वास्तु शास्त्र के अनुसार, आभूषण केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि को संचित करते हैं। सोना (Gold) को गुरु और सूर्य का कारक माना गया है, जबकि हीरा (Diamond) शुक्र का प्रतीक है।
रखने का स्थान: भारी गहने जैसे हार, कंगन और चूड़ियां हमेशा तिजोरी के दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखने चाहिए। यह हिस्सा पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है जो संपत्ति को स्थायित्व प्रदान करता है। मंगलसूत्र जैसे पवित्र आभूषणों को कभी भी जमीन पर या गंदे स्थान पर न रखें। चांदी की पायल को उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है क्योंकि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है और उत्तर दिशा कुबेर की।
संपत्ति के कागज, चेकबुक, पासबुक, डिग्रियां और कुंडली आपके भविष्य और सुरक्षा का आधार हैं। इन्हें अव्यवस्थित रखना आपके करियर और आर्थिक उन्नति में बाधा बन सकता है।
वास्तु टिप: संपत्ति के कागज (Property Papers) को उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा में रखने से उनकी कानूनी प्रक्रियाएं सुचारू रहती हैं और संपत्ति विवादों से मुक्ति मिलती है। वहीं, चेकबुक और पासबुक को उत्तर दिशा में रखना चाहिए ताकि धन का प्रवाह बना रहे। डिग्रियां और कुंडली को पूर्व दिशा की ओर बने दराजों में रखना ज्ञान और सम्मान में वृद्धि करता है।
तिजोरी धन की देवी लक्ष्मी का निवास स्थान मानी जाती है। तिजोरी को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए, उसमें कम से कम एक चांदी का सिक्का या लाल कपड़े में बंधा गोमती चक्र अवश्य रखें।
दिशा निर्देश: तिजोरी को कमरे की दक्षिण दीवार (South Wall) के पास इस तरह रखें कि उसका दरवाजा उत्तर (North) दिशा की ओर खुले। उत्तर दिशा कुबेर देव की है, जो धन के भंडार को बढ़ाती है। तिजोरी के ऊपर कोई भी भारी सामान या कबाड़ न रखें।
हिंदू धर्म और वास्तु में गाय को 'कामधेनु' का स्वरूप माना गया है। गौशाला का निर्माण उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) या दक्षिण-पूर्व दिशा में करना श्रेष्ठ होता है। गाय की सेवा करने से पितृ दोष समाप्त होते हैं और घर में अचल संपत्ति की प्राप्ति होती है। गौशाला को हमेशा साफ और हवादार रखें।
जमीन खरीदने से पहले मिट्टी का परीक्षण और ढलान का विशेष ध्यान रखें। उत्तर या पूर्व की ओर ढलान वाली जमीन आर्थिक लाभ देती है। प्लॉट का आकार वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए। अनियमित आकार की जमीन निवेश के लिए हानिकारक हो सकती है।
यदि आप कर्ज (Loan) से परेशान हैं, तो ऋण की किस्तें हमेशा मंगलवार से चुकाना शुरू करें। बैंक संबंधी कागजात कभी भी दक्षिण दिशा में न रखें, अन्यथा कर्ज चुकाने में देरी हो सकती है। जमा पूंजी (Savings) को हमेशा ईशान कोण या उत्तर दिशा की ओर रखें।
व्यवसायिक सफलता के लिए पैसे का काउंटर अत्यंत महत्वपूर्ण है। काउंटर के ऊपर कभी भी भारी सामान न लटकाएं। गल्ले में एक छोटा दर्पण (Mirror) इस प्रकार लगाएं कि वह पैसों को प्रतिबिंबित करे, इससे धन दोगुना होता है। दुकानदार का मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए।
यदि आपको रास्ते में गिरे हुए पैसे मिलते हैं, तो इसे दैवीय संकेत माना जाता है। यदि राशि बड़ी है तो उसे किसी धार्मिक कार्य या दान में दें। अपने पास रखने पर इसे शुद्ध करके अपनी तिजोरी के एक अलग कोने में रखें, मुख्य धन में न मिलाएं। यह लक्ष्मी के आने का शुभ संकेत है किंतु इसके साथ लालच नहीं होना चाहिए।
वाहन (चल संपत्ति) को हमेशा उत्तर-पश्चिम दिशा में पार्क करें। अचल संपत्ति (भवन, भूमि) के विस्तार के लिए दक्षिण दिशा को भारी रखना और उत्तर दिशा को खुला रखना अनिवार्य है। संपत्ति के विवाद सुलझाने के लिए घर के मध्य (ब्रह्मस्थान) को खाली और स्वच्छ रखें।
धन संचय के लिए घर में श्रीयंत्र, महालक्ष्मी यंत्र और दक्षिणवर्ती शंख रखना अत्यंत फलदायी होता है। इन्हें शुक्रवार के दिन स्थापित करें। कपूर का नियमित दान और घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह धन के आगमन के मार्गों को प्रशस्त करता है।
मंदिर हमेशा ईशान कोण (North-East) में होना चाहिए। भगवान की मूर्तियों का मुख एक-दूसरे के सामने न हो। टूटी हुई मूर्तियां दरिद्रता लाती हैं, उन्हें तुरंत प्रवाहित करें।
...(इसी प्रकार धन-वैभव की रक्षा और वृद्धि के लिए वास्तु के सूक्ष्म नियमों का पालन करें)...
वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, यह पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के साथ सामंजस्य बिठाने की कला है। जब हम अपने धन और वैभव को सही दिशा और ऊर्जा में रखते हैं, तो वह न केवल सुरक्षित रहता है बल्कि उसमें निरंतर वृद्धि भी होती है।