भूमिगत टैंक / बोरवेल (Underground Tank/Borewell)
वास्तु शास्त्र में भूमिगत जल स्रोत को घर की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जाओं में से एक माना गया है क्योंकि यह सीधे पृथ्वी और जल तत्व के मिलन को दर्शाता है।
1. सर्वश्रेष्ठ स्थान: जमीन के नीचे का टैंक, कुआं या बोरवेल हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान है और यहाँ जल का होना सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है।
2. वर्जित दिशाएं: इसे कभी भी दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में न बनवाएं, इससे घर के मुखिया को भारी आर्थिक हानि और मानसिक तनाव हो सकता है। दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) में जल स्रोत होना 'अग्नि और जल' का शत्रुतापूर्ण संबंध बनाता है, जिससे दुर्घटनाओं का भय रहता है।
3. खुदाई का नियम: टैंक की खुदाई हमेशा वास्तु मुहूर्त देखकर ही शुरू करनी चाहिए। उत्तर-पूर्व में गहराई होने से घर में धन का संचय बढ़ता है।
4. सफाई: भूमिगत टैंक को नियमित रूप से साफ रखें। गंदा जल या जमा हुई काई राहु के दोष को बढ़ाती है, जिससे परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
ईशान कोण में जल स्रोत होने से वंश वृद्धि होती है, बुद्धि तेज होती है और घर में निरंतर धन का प्रवाह बना रहता है।
छत की पानी की टंकी (Overhead Water Tank)
छत पर रखी टंकी भारी वजन का प्रतीक होती है, इसलिए इसका नियम भूमिगत टैंक से बिल्कुल विपरीत होता है।
1. गुरुत्वाकर्षण और वजन: भारी पानी की टंकी हमेशा दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में होनी चाहिए। यह कोना भारी होना चाहिए ताकि घर में स्थिरता बनी रहे।
2. ऊंचाई: छत की टंकी को सीधे छत पर रखने के बजाय, उसे फर्श से कम से कम 1-2 फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर रखना चाहिए। इससे पानी का दबाव भी सही रहता है और वास्तु संतुलन भी।
3. वर्जित स्थान: इसे कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान) में न रखें। यहाँ भारी वजन होने से घर की सकारात्मक ऊर्जा दब जाती है और विकास रुक जाता है। मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) में भी टंकी रखना गंभीर दोष माना जाता है।
4. ढक्कन की सावधानी: टंकी का ढक्कन हमेशा बंद होना चाहिए। खुली टंकी से पानी का वाष्पीकरण और उसमें गिरने वाली गंदगी नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
सही दिशा में रखी भारी टंकी घर को स्थिरता प्रदान करती है, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाती है और परिवार के भविष्य को सुरक्षित करती है।
रसोई का सिंक (Kitchen Sink)
रसोई में अग्नि और जल का सामंजस्य ही गृहणी और परिवार के स्वास्थ्य को तय करता है।
1. सिंक की स्थिति: सिंक हमेशा रसोई घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में होना चाहिए। यह जल की शुद्ध दिशा है।
2. चूल्हे से दूरी: सिंक (जल) और गैस का चूल्हा (अग्नि) कभी भी एक-दूसरे के पास या बिल्कुल सटकर नहीं होने चाहिए। इनके बीच कम से कम 2-3 फीट की दूरी अनिवार्य है। यदि जगह कम हो, तो बीच में लकड़ी का विभाजन या कोई बाधा रखें।
3. शुद्धता: सिंक में रात भर झूठे बर्तन न छोड़ें। गंदा पानी और झूठन राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को आमंत्रित करते हैं जिससे आर्थिक तंगी आ सकती है।
4. पानी का टपकना: यदि सिंक का नल टपक रहा है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं। टपकता हुआ जल लक्ष्मी के जाने का प्रतीक है।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
ईशान कोण का सिंक घर में शांति लाता है और जल-अग्नि का संतुलन बने रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होतीं।
सेप्टिक टैंक (Septic Tank)
सेप्टिक टैंक घर की अशुद्धियों को जमा करने का स्थान है, इसलिए इसकी दिशा का चुनाव अत्यंत गंभीर विषय है।
1. विसर्जन की दिशा: सेप्टिक टैंक के लिए सबसे उपयुक्त स्थान उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) का पश्चिमी भाग है। यह विसर्जन (Elimination) की दिशा है।
2. वर्जित क्षेत्र: इसे कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान) में न बनवाएं, यह महादोष है जो कैंसर जैसी बीमारियों और वंश हानि का कारण बन सकता है। इसे दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) या दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में भी बनाने से बचना चाहिए।
3. निर्माण का तरीका: टैंक की दीवारें घर की मुख्य दीवार से नहीं जुड़नी चाहिए। इसके बीच कुछ अंतर होना आवश्यक है।
4. गहराई: सेप्टिक टैंक की गहराई उत्तर-पूर्व के भूमिगत पानी के टैंक से अधिक नहीं होनी चाहिए।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
सही स्थान पर बना सेप्टिक टैंक घर के निवासियों को मानसिक शांति देता है और पुरानी बीमारियों को घर से बाहर रखता है।
तरणताल / स्विमिंग पूल (Swimming Pool)
आधुनिक घरों में स्विमिंग पूल ऐश्वर्य का प्रतीक है, लेकिन वास्तु सम्मत न होने पर यह मानसिक अशांति दे सकता है।
1. जल तत्व का विस्तार: पूल हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में होना चाहिए। यहाँ जल का बड़ा भंडार घर में सुख-समृद्धि और प्रसन्नता लाता है।
2. आकार: वर्गाकार या आयताकार पूल वास्तु की दृष्टि से श्रेष्ठ हैं। टेढ़े-मेढ़े या नुकीले कोनों वाले पूल ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डालते हैं।
3. वर्जित क्षेत्र: दक्षिण या पश्चिम दिशा में पूल बनवाने से जीवन में संघर्ष बढ़ता है और व्यापार में हानि हो सकती है।
4. स्वच्छता: पूल का पानी हमेशा साफ और गतिशील (Moving) होना चाहिए। रुका हुआ और गंदा पानी भारी वास्तु दोष पैदा करता है।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
ईशान का पूल परिवार में आनंद का संचार करता है और बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है।
जल निकासी व्यवस्था (Water Drainage System)
घर से निकलने वाला पानी अपने साथ घर की ऊर्जा भी ले जाता है।
1. प्रवाह की दिशा: घर के अंदर का उपयोग किया हुआ पानी हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर से बाहर निकलना चाहिए। यह शुभता का संकेत है।
2. वर्जित मार्ग: पानी की निकासी कभी भी दक्षिण या पश्चिम की ओर से नहीं होनी चाहिए। इससे धन की हानि होती है और मेहनत का फल नहीं मिलता।
3. पाइपलाइन: शौचालय और रसोई की पाइपलाइन अलग-अलग होनी चाहिए। इन्हें कभी भी ईशान कोण के नीचे से नहीं गुजारना चाहिए।
4. खुला नाला: घर के मुख्य द्वार के सामने कभी भी खुला नाला या गंदा पानी जमा नहीं होना चाहिए, यह 'द्वार वेध' दोष पैदा करता है।
आध्यात्मिक एवं भौतिक प्रभाव:
सही जल निकासी घर की नकारात्मक ऊर्जा को सुचारू रूप से बाहर निकालती है और सकारात्मकता बनाए रखती है।