वास्तु शास्त्र में पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का संतुलन ही सुख और समृद्धि का आधार है। जल (Water) का संबंध सीधे तौर पर धन के प्रवाह और मानसिक शांति से होता है। जल तत्व का स्वामी दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) है। यदि घर में जल से संबंधित तत्व जैसे नल, मटका, टंकी या फव्वारा सही दिशा में न हों, तो यह कर्ज, बीमारी और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। यहाँ जल से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तत्वों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है।
आधुनिक समय में आरओ (RO) और वाटर प्यूरीफायर हर रसोई का अभिन्न हिस्सा हैं।
वास्तु नियम: इन्हें हमेशा रसोई के उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में स्थापित करना चाहिए।
सावधानी: इन्हें कभी भी दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) के एकदम कोने में अग्नि (चूल्हे) के पास न रखें, क्योंकि जल और अग्नि का मेल वास्तु दोष पैदा करता है। यदि आरओ से पानी टपकता है, तो यह धन के अपव्यय का प्रतीक है।
फव्वारा न केवल सुंदरता बढ़ाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।
स्थान: घर के बगीचे या प्रवेश द्वार के उत्तर या पूर्व दिशा में फव्वारा लगाना सर्वोत्तम है।
प्रवाह: फव्वारे के पानी का बहाव हमेशा घर के मुख्य द्वार की तरफ (अंदर की ओर) होना चाहिए, बाहर की ओर नहीं। बेडरूम में कभी फव्वारा न लगायें।
जल का मटका: मिट्टी का घड़ा या मटका घर में शीतलता और धन लाता है। इसे रसोई के उत्तर भाग में रखना चाहिए। मटका कभी खाली न रखें।
भरी बाल्टी: बाथरूम में हमेशा नीले रंग की बाल्टी को जल से भरकर रखना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में सहायक होता है। खाली बाल्टी घर में तनाव पैदा कर सकती है।
भूमिगत जल स्रोतों का स्थान बहुत संवेदनशील होता है।
सर्वश्रेष्ठ दिशा: कुआँ, नलकूप या ट्यूबवेल हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में ही होना चाहिए।
दुष्प्रभाव: यदि ये दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) में हों, तो परिवार के मुखिया को भारी आर्थिक और शारीरिक नुकसान हो सकता है। इन्हें कभी भी घर के मध्य (ब्रह्मस्थान) में न खोदा जाए।
अंडरग्राउंड वाटर टैंक: इसे केवल उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में ही बनाना चाहिए। यह सुख-संपत्ति में वृद्धि करता है।
ओवरहेड टैंक (छत की टंकी): चूँकि छत पर रखी टंकी भारी होती है, इसलिए इसे दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में रखना चाहिए। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व में न रखें, वरना घर में कर्ज बढ़ सकता है।
जल का टांका: वर्षा जल संचयन के लिए बनाया गया टांका उत्तर दिशा में शुभ फल देता है।
एक्वेरियम: मछली घर घर की नकारात्मकता को सोख लेता है। इसे लिविंग रूम के उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
मछलियाँ: एक्वेरियम में 8 सुनहरी (Goldfish) और 1 काली मछली रखना वास्तु में अत्यंत भाग्यशाली माना जाता है। यदि कोई मछली मर जाए, तो उसे तुरंत हटाकर नई मछली लायें, यह माना जाता है कि वह आपके ऊपर आने वाली मुसीबत खुद पर ले गई।
गीजर: चूँकि गीजर पानी और बिजली (अग्नि) दोनों का मिश्रण है, इसे बाथरूम के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोने में लगाना चाहिए।
पानी की मोटर: मोटर को हमेशा घर के वायव्य (उत्तर-पश्चिम) या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना उचित है। इसे उत्तर-पूर्व में रखने से बचें क्योंकि यहाँ भारी उपकरण वर्जित हैं।
बाल्टी खींचना: कुएँ से पानी खींचने वाली बाल्टी और रस्सी को उपयोग के बाद करीने से दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
स्विमिंग पूल: घर के बड़े परिसर में स्विमिंग पूल हमेशा उत्तर या पूर्व भाग में बनाना चाहिए। पश्चिम में बना पूल केवल तभी उचित है जब वह ऊँचाई पर न हो।
वाटर फॉल पैनल: आजकल दीवारों पर लगने वाले वाटर फॉल बहुत लोकप्रिय हैं। इन्हें घर के हॉल में उत्तर दिशा की दीवार पर लगायें। पानी गिरने की आवाज मधुर होनी चाहिए, कर्कश नहीं।
वर्षा जल संचयन टैंक: बारिश के पानी को सहेजने का टैंक उत्तर दिशा में होने से घर की बरकत बनी रहती है।
पक्षियों का जलपात्र: अपनी छत के उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में पक्षियों के लिए पानी रखना कुंडली के दोषों को शांत करता है और व्यापार में उन्नति लाता है।
कूलर की पानी टंकी: कूलर को हमेशा वायव्य (उत्तर-पश्चिम) दिशा में रखना चाहिए। कूलर की टंकी का पानी नियमित बदलते रहें, गंदा पानी राहु दोष पैदा करता है।
नल: घर के सभी नल सही होने चाहिए। टपकता हुआ नल आर्थिक तंगी का संकेत है।
जल का वहाव: घर से गंदे पानी या बारिश के पानी के निकलने का वहाव हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम या दक्षिण की ओर बहाव धन को घर से बाहर ले जाता है।
जल कुंड: बगीचे में बना छोटा जल कुंड या कमल का तालाब उत्तर-पूर्व में होने से मानसिक शांति मिलती है।
वास्तु शास्त्र के ग्रंथों जैसे 'विश्वकर्मा प्रकाश' और 'मयमतम' में जल को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है।
1. जल कलश का रहस्य: घर के मंदिर में जल से भरा तांबे का कलश उत्तर-पूर्व में रखना साक्षात् कुबेर की कृपा लाता है। इस पानी को रोज सुबह घर के मुख्य द्वार पर छिड़कना चाहिए।
2. जल और व्यावसायिक क्षेत्र: यदि आपका कार्यालय (Office) है, तो वहां आरओ को उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में रखें ताकि ग्राहकों का आवागमन बढ़े।
3. फार्महाउस और गौशाला: गौशाला (Cow Shed) में पानी की चरनी और टैंक को उत्तर दिशा में बनाना चाहिए ताकि पशु स्वस्थ रहें और दुग्ध उत्पादन बढ़े।
4. व्यावसायिक कार्यक्षेत्र (Hospital/Industry): औद्योगिक इकाइयों में भारी जल भंडारण नैऋत्य में और अग्नि शमन हेतु जल ईशान में होना चाहिए।