अध्याय १९: वायु तत्व का विस्तार
प्राण वायु और सूर्य के प्रकाश का स्वागत
वास्तु शास्त्र में बरामदे को घर का 'फेफड़ा' माना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ से घर श्वसन करता है। बरामदा न केवल बैठने के लिए एक सुखद स्थान है, बल्कि यह घर के भीतर की दूषित ऊर्जा को बाहर निकालने और ताजी ऊर्जा को भीतर लाने का मुख्य मार्ग है। बरामदा हमेशा घर के मुख्य निर्माण से थोड़ा नीचा होना चाहिए।
ईशान कोण में बरामदा सबसे शुभ है। यहाँ से आने वाली सुबह की किरणें स्वास्थ्य और सौभाग्य लाती हैं। इसे हमेशा खुला और साफ रखें।
पूर्व में बरामदा होने से सामाजिक मान-सम्मान बढ़ता है और परिवार के सदस्य ऊर्जावान महसूस करते हैं।
बरामदे में भारी फर्नीचर रखने से बचना चाहिए। यदि आप कुर्सियाँ या झूला (Swing) लगाना चाहते हैं, तो उसे **उत्तर-पश्चिम (वायव्य)** या **दक्षिण-पश्चिम** की ओर रखें। बरामदे का उत्तर-पूर्व हिस्सा पूरी तरह खाली होना चाहिए।
बरामदे में झूला इस प्रकार लगाएं कि वह **उत्तर से दक्षिण** की ओर झूलता हो। यह मानसिक शांति और आनंद का प्रतीक माना जाता है।
बरामदा पौधों के लिए सबसे अच्छी जगह है। यहाँ रखे पौधे हवा को शुद्ध करते हैं और सकारात्मकता बढ़ाते हैं।
| पौधे का नाम | सही स्थान | वास्तु लाभ |
|---|---|---|
| तुलसी (Basil) | उत्तर-पूर्व (ईशान) | आध्यात्मिक सुरक्षा और शुद्धि |
| मनी प्लांट | पूर्व या उत्तर | आर्थिक प्रगति और शांति |
| फूलों वाले छोटे पौधे | पश्चिम या उत्तर | मानसिक प्रसन्नता |
बरामदे की छत मुख्य घर की छत से नीची होनी चाहिए। बरामदे की ढलान हमेशा **पूर्व या उत्तर** की ओर होनी चाहिए ताकि बारिश का पानी इसी दिशा में बहे। यह धन के आगमन को सुगम बनाता है।
अंत में, बरामदे की दीवारों के लिए **हल्का नीला, सफेद या पुदीना हरा (Mint Green)** रंग चुनें। शाम के समय यहाँ मद्धम रोशनी का प्रबंध अवश्य करें ताकि घर का यह प्रवेश द्वार हमेशा जीवंत बना रहे।