अध्याय २१: विसर्जन और दोष निवारण
घर की अशुद्धियों का सही विस्थापन
शौचालय घर का वह हिस्सा है जहाँ हम शरीर के अपशिष्टों का त्याग करते हैं। वास्तु शास्त्र में इसे 'विसर्जन' (Elimination) का स्थान माना गया है। यदि यह सही दिशा में न हो, तो यह घर की सकारात्मक ऊर्जा, धन और स्वास्थ्य का भी विसर्जन कर सकता है। शौचालय का मुख्य कार्य अशुद्धियों को बाहर निकालना है, संचय करना नहीं।
शौचालय के भीतर कमोड या सीट इस प्रकार होनी चाहिए कि उस पर बैठते समय व्यक्ति का मुख **उत्तर या दक्षिण** दिशा की ओर रहे। पूर्व की ओर मुख करके बैठना वर्जित है, क्योंकि पूर्व सूर्य और ज्ञान की दिशा है।
| पहलु | सही स्थिति / नियम | प्रभाव |
|---|---|---|
| सीट का मुख | उत्तर या दक्षिण | स्वास्थ्य और पाचन |
| टॉयलेट पेपर/पानी | पश्चिम या दक्षिण दीवार | सुविधा और नियम |
| खिड़की/वेंटिलेशन | पश्चिम या उत्तर | अशुद्ध वायु का निकास |
शौचालय का फर्श घर के मुख्य फर्श से थोड़ा नीचा होना चाहिए। पानी का बहाव हमेशा **उत्तर या पूर्व** की ओर होना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि मल-मूत्र का निकास (Outflow) दक्षिण या पश्चिम की ओर से बाहर जाना चाहिए।
शौचालय के लिए **सफेद, हल्का ग्रे, क्रीम या हल्के मिट्टी जैसे रंगों** का चुनाव करें। काले या गहरे नीले रंगों से यहाँ पूरी तरह बचना चाहिए। शौचालय हमेशा सूखा और सुंगधित होना चाहिए। यहाँ कपूर या लेमनग्रास की खुशबू का प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा को दबाने में मदद करता है।
यदि शौचालय गलत दिशा में बना है और उसे हटाना संभव नहीं है, तो निम्नलिखित उपाय करें:
अंत में, यह सुनिश्चित करें कि शौचालय का दरवाजा कभी भी खुला न रहे। शौचालय की सफाई 'शनि' को प्रसन्न करती है, इसलिए इसे हमेशा चमकदार और स्वच्छ रखें।