वास्तु शास्त्र के अनुसार, अध्ययन कक्ष केवल पढ़ाई करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जा क्षेत्र है जहाँ मन और बुद्धि का मिलन होता है। एक सही दिशा और विन्यास वाला अध्ययन कक्ष विद्यार्थी की एकाग्रता (Concentration) को बढ़ाता है और सीखने की क्षमता को तीव्र करता है।
अध्ययन कक्ष में बुध (बुद्धि के देवता) और बृहस्पति (ज्ञान के देवता) का प्रभाव सबसे अधिक होता है। यदि यह कक्ष दोषपूर्ण है, तो विद्यार्थी का मन पढ़ाई में नहीं लगता और उसे याद रखने में कठिनाई होती है।
अध्ययन कक्ष के लिए घर की **उत्तर (North)**, **पूर्व (East)** या **उत्तर-पूर्व (ईशान)** दिशा सर्वोत्तम मानी गई है।
कभी भी दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोण में अध्ययन कक्ष नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि इससे मन में बेचैनी और क्रोध बढ़ सकता है।
पढ़ते समय विद्यार्थी का मुख हमेशा **पूर्व या उत्तर** दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा सूर्य की ऊर्जा प्रदान करती है, जबकि उत्तर दिशा नई संभावनाओं के द्वार खोलती है।
पुस्तकों की अलमारी या रैक को अध्ययन कक्ष की **उत्तर या पूर्व** दिशा में नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा **दक्षिण या पश्चिम** की दीवार पर होना चाहिए। अलमारी कभी भी मेज के ठीक ऊपर (Overhead) नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह मानसिक दबाव पैदा करती है।
अध्ययन कक्ष में प्राकृतिक रोशनी का होना अनिवार्य है। मेज पर रखी लैंप (Study Lamp) को मेज के **दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)** कोने में रखना चाहिए। ध्यान रहे कि पढ़ते समय विद्यार्थी की छाया किताबों पर न पड़े।
अध्ययन कक्ष के लिए हल्के रंगों का प्रयोग करें। हल्का हरा (बुध का रंग), क्रीम, या सफेद रंग सर्वोत्तम हैं। हल्का हरा रंग आंखों को शांति देता है और एकाग्रता बढ़ाता है। गहरे रंगों जैसे काले, गहरे नीले या गहरे लाल रंग से यहाँ पूरी तरह बचना चाहिए।
अध्ययन कक्ष की दीवार पर मां सरस्वती, महान विचारकों के चित्र या उगते हुए सूरज की तस्वीर लगाना अत्यंत शुभ है। ग्लोब (Globe) या पिरामिड को मेज के उत्तर-पूर्व कोने में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। यहाँ कभी भी हिंसक या दुखद तस्वीरें न लगाएं।
अध्ययन कक्ष में कबाड़ या पुरानी रद्दी इकट्ठा न होने दें। धूल और गंदगी बुध ग्रह को कमजोर करती है। कमरे में कपूर या चंदन की हल्की खुशबू एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। यदि कमरे में कोई बीम (Beam) है, तो उसके नीचे बैठकर कभी न पढ़ें।