वास्तु शास्त्र के अनुसार, दुकान का मुख्य द्वार पूर्व (East), उत्तर (North) या ईशान कोण (North-East) में होना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा और ग्राहकों के निरंतर आगमन को सुनिश्चित करती हैं।
दुकान के मालिक या बैठने वाले का स्थान नैऋत्य कोण (South-West) में होना चाहिए। बैठते समय मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए।
दुकान का भारी स्टॉक, अलमारियां और शोकेस हमेशा दक्षिण (South) और पश्चिम (West) की दीवारों पर होने चाहिए। उत्तर और पूर्व के हिस्से को जितना हो सके खाली और हल्का रखें।
दुकान में छोटा मंदिर या इष्ट देव की तस्वीर हमेशा ईशान कोण (North-East) में लगानी चाहिए। सुबह दुकान खोलते ही सबसे पहले दीप प्रज्वलित करना चाहिए जिससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो।
इनवर्टर, जनरेटर, बिजली का मुख्य बोर्ड और अन्य ऊष्मीय उपकरण हमेशा आग्नेय कोण (South-East) में स्थापित करने चाहिए।
व्यावसायिक स्थल पर हमेशा प्रसन्नता दायक रंगों का प्रयोग करें जैसे हल्का पीला, सफेद, क्रीम या हल्का नीला। पर्याप्त रोशनी (Light) ग्राहकों को आकर्षित करती है और आलस्य को दूर करती है।
दुकान की उत्तर या पूर्व की दीवार पर बड़ा दर्पण (Mirror) लगाना वास्तु के अनुसार अत्यंत लाभकारी होता है। यह ग्राहकों की संख्या और समृद्धि को दोगुना करने का प्रतीक माना जाता है।
कपड़ों की दुकान, ज्वेलरी शॉप और किराने की दुकान के लिए वास्तु के विशेष आयाम होते हैं जिनका पालन करके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।