अध्याय २६: आकाश तत्व का संतुलन
खुला आकाश, ऊँचाई और समृद्धि का वास्तु
छत घर की सबसे ऊपरी सीमा है जो हमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) से जोड़ती है। वास्तु के अनुसार छत का साफ और व्यवस्थित होना घर के मुखिया की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है। एक गंदी छत मानसिक भ्रम और प्रगति में बाधा का कारण बनती है।
छत पर गिरने वाले वर्षा जल का निकास सही दिशा में होना अत्यंत आवश्यक है। गलत ढलान घर में आर्थिक तंगी ला सकता है।
छत की ढलान **उत्तर या पूर्व** की ओर होनी चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन सुचारू रहता है।
दक्षिण या पश्चिम की ओर ढलान होने से बीमारियाँ और अनावश्यक खर्चे बढ़ते हैं।
छत पर रखी जाने वाली भारी वस्तुएं जैसे पानी की टंकी आदि का स्थान निश्चित होना चाहिए:
| वस्तु/उपकरण | सही दिशा | वास्तु प्रभाव |
|---|---|---|
| ओवरहेड वॉटर टैंक | दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) | स्थिरता और सुरक्षा |
| सोलर पैनल (Solar) | दक्षिण-पश्चिम / दक्षिण | ऊर्जा का अधिकतम लाभ |
| छत का स्टोर रूम | दक्षिण या पश्चिम | पृथ्वी तत्व का संतुलन |
| सीढ़ी का कमरा (Mumty) | दक्षिण-पश्चिम | घर की ऊँचाई का सही भार |
छत की मुंडेर (Parapet Wall) की ऊँचाई २-३ फीट होनी चाहिए। दक्षिण और पश्चिम की मुंडेर उत्तर और पूर्व की तुलना में ऊँची और भारी होनी चाहिए। छत पर **सफेद या हल्के रंगों** की टाइल्स लगाना उत्तम है क्योंकि ये गर्मी को कम करती हैं और सात्विक ऊर्जा बढ़ाती हैं।
अंत में, अमावस्या या किसी विशेष पर्व पर छत की सफाई अवश्य करें। रात के समय छत के दक्षिण-पश्चिम कोने में एक मद्धम रोशनी वाला बल्ब जलाना घर की सुरक्षा और उन्नति के लिए अच्छा माना जाता है।