वास्तु शास्त्र में पूजा घर को घर का सबसे पवित्र और संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। यह वह स्थान है जहाँ से पूरे घर में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है। जैसे मनुष्य के शरीर में 'आज्ञा चक्र' का महत्व है, वैसे ही भवन में पूजा घर का। सही स्थान पर बना मंदिर मानसिक शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करता है।
पूजा घर केवल प्रार्थना का स्थान नहीं है, बल्कि यह वह शक्ति केंद्र है जो घर के अन्य वास्तु दोषों के प्रभाव को कम करने की क्षमता रखता है।
पूजा घर के लिए **उत्तर-पूर्व (ईशान कोण)** दिशा सर्वोत्तम मानी गई है। ईशान कोण जल और आकाश तत्व का संगम है, जहाँ बृहस्पति (गुरु) का वास होता है।
ध्यान रखें कि मंदिर कभी भी दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या आग्नेय कोण में नहीं होना चाहिए, अन्यथा यह मानसिक तनाव और धन हानि का कारण बन सकता है।
मंदिर में मूर्तियों का मुख इस प्रकार होना चाहिए कि पूजा करते समय हमारा मुख **पूर्व या उत्तर** की ओर हो। मूर्तियों को दीवार से कम से कम 1 इंच दूर रखना चाहिए ताकि वायु का संचार होता रहे।
पूजा घर के ऊपर, नीचे या साथ वाली दीवार पर शौचालय (Toilet) कभी नहीं होना चाहिए। इसे सीढ़ियों के नीचे बनाना भारी वास्तु दोष माना जाता है। बेडरूम में मंदिर बनाने से बचना चाहिए, लेकिन यदि स्थान की कमी हो, तो सोते समय मंदिर पर पर्दा जरूर डाल देना चाहिए।
पूजा घर की दीवारों के लिए सफेद, हल्का पीला या हल्का नीला रंग सर्वोत्तम है। ये रंग एकाग्रता और शांति बढ़ाते हैं। गहरे रंगों जैसे काले या गहरे भूरे रंग का प्रयोग यहाँ वर्जित है। मंदिर की छत पर पिरामिड के आकार का शिखर होना ऊर्जा को संचित करने में सहायक होता है।
दीपक और अगरबत्ती जलाने का स्थान हमेशा मंदिर के **दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)** कोण में होना चाहिए। मंदिर में कभी भी सूखे हुए फूल या खंडित मूर्तियाँ नहीं रखनी चाहिए। पूजा की सामग्री (किताबें, घंटी, धूप) को मंदिर के पश्चिम या दक्षिण हिस्से में बने रैक में रखना चाहिए।
वास्तु के अनुसार, मृत पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी देवताओं के साथ मंदिर में नहीं रखनी चाहिए। पूर्वजों की तस्वीरें घर की दक्षिण या पश्चिम दीवार पर लगानी चाहिए। मंदिर में रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है।
पूजा घर में सुबह और शाम नियमित रूप से शंख ध्वनि या घंटी बजानी चाहिए, इससे नकारात्मक तरंगें नष्ट होती हैं। ताजे फूलों का प्रयोग और चंदन की सुगंध वातावरण को सात्विक बनाए रखती है। फर्श को नमक के पानी से पोंछना भी यहाँ की पवित्रता को सुरक्षित रखता है।