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भूखंड (Plot) एवं मानचित्र वास्तु विश्लेषण: संपूर्ण मार्गदर्शिका

वास्तु शास्त्र में किसी भी निर्माण की सफलता उसकी नींव और उस भूखंड (Land/Plot) की ऊर्जा पर निर्भर करती है जिस पर वह खड़ा है। VASTU VIKAS - Plot Map Analyzer आपको वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समझने में मदद करता है कि आपका भूखंड आपके भविष्य के लिए कैसा रहेगा।

1. भूखंड की दिशाओं का महत्व (Orientation of Plot)

वास्तु में चार मुख्य दिशाएँ (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) और चार विदिशाएँ (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य) होती हैं।

उत्तर मुखी (North Facing): यह धन के देवता कुबेर की दिशा है। व्यापार और समृद्धि के लिए सर्वोत्तम है।
पूर्व मुखी (East Facing): यह सूर्य की दिशा है। ज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक यश के लिए शुभ मानी जाती है।
दक्षिण मुखी (South Facing): इसे अक्सर अशुभ माना जाता है, लेकिन यदि प्रवेश द्वार सही पद (Sahi Pada) पर हो, तो यह अत्यंत फलदायी हो सकता है।

2. भूखंड का आकार (Shape of the Plot)

जमीन का आकार उसके भीतर ऊर्जा के प्रवाह (Energy Flow) को निर्धारित करता है।

3. मानचित्र (Map) तैयार करने के वास्तु नियम

नक्शा बनाते समय 'पदम विन्यास' का ध्यान रखना अनिवार्य है। प्लॉट को 81 या 64 भागों में बांटकर मुख्य बिंदुओं का निर्धारण किया जाता है।

ब्रह्मस्थान (Central Space):

भूखंड के बीच का हिस्सा 'ब्रह्मस्थान' कहलाता है। मानचित्र के अनुसार इसे हमेशा खुला और भारी निर्माण से मुक्त रखना चाहिए। यहाँ कोई भी दीवार, खंभा या टॉयलेट नहीं होना चाहिए।

ढलान और ऊंचाई (Slope Analysis):

प्लॉट की ढलान हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए। दक्षिण और पश्चिम का हिस्सा उत्तर और पूर्व की तुलना में ऊंचा होना चाहिए।

4. पंचतत्व और भूखंड का विश्लेषण

वास्तु शास्त्र पंचतत्वों (जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु, आकाश) के संतुलन का विज्ञान है।

ईशान (NE): जल तत्व। यहाँ बोरवेल, भूमिगत पानी की टंकी या पूजा घर रखें।
आग्नेय (SE): अग्नि तत्व। यहाँ रसोई या बिजली के उपकरण रखें।
नैऋत्य (SW): पृथ्वी तत्व। यहाँ मास्टर बेडरूम या भारी सामान रखें।
वायव्य (NW): वायु तत्व। यहाँ मेहमानों का कमरा या गैरेज रखें।

5. भूखंड परीक्षण की वैज्ञानिक विधियां

जमीन खरीदने से पहले मिट्टी का परीक्षण करना चाहिए। मिट्टी का रंग, गंध और उसकी जल अवशोषण क्षमता से उसके वास्तु दोषों का पता लगाया जा सकता है।

बीज परीक्षण (Seed Testing):

प्लॉट पर कुछ बीज बोयें। यदि वे 3-5 दिनों में स्वस्थ तरीके से उगते हैं, तो वह भूमि सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है।

गड्ढा परीक्षण (Pit Testing):

प्लॉट के बीच में एक हाथ गहरा गड्ढा खोदें और उसे पानी से भर दें। यदि पानी जल्दी सोख लिया जाए, तो भूमि मध्यम है। यदि पानी काफी देर तक रहे, तो भूमि उत्तम है।

6. सड़क और भूखंड का संबंध (Veedhi Shoola)

प्लॉट के सामने सड़क की स्थिति को 'वीथि शूल' कहते हैं। यदि सड़क सीधे प्लॉट के किसी कोने पर आकर टकराती है, तो वह भारी वास्तु दोष पैदा कर सकती है।

7. भूखंड के आसपास का वातावरण

श्मशान, मंदिर, अस्पताल या बिजली के बड़े ट्रांसफार्मर के बहुत पास वाले प्लॉट खरीदने से बचना चाहिए।

8. मानचित्र सुधार (Remedies in Map)

यदि प्लॉट का आकार अनियमित है, तो उसे पिरामिड या वास्तु पट्टी (Vastu Strip) के माध्यम से 'काटकर' (Cut-off technique) संतुलित किया जा सकता है।