अध्याय २७: गति और वायु तत्व का समन्वय
वाहनों का सही स्थान और सुरक्षित आवागमन
वास्तु शास्त्र में वाहनों को 'वायु तत्व' (Air Element) से जोड़ा गया है। वायु तत्व चंचलता और गति का प्रतीक है। यदि पार्किंग सही दिशा में न हो, तो वाहनों में बार-बार खराबी, दुर्घटना की संभावना और यात्रा में अनावश्यक विलंब जैसी समस्याएं आती हैं।
प्रथम विकल्प। यहाँ खड़े वाहन कम खराब होते हैं और यात्रा हमेशा सुखद व सफल रहती है।
द्वितीय विकल्प। यहाँ छोटी गाड़ियाँ या दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं, लेकिन अग्नि तत्व के कारण रखरखाव का ध्यान रखना पड़ता है।
पार्किंग में वाहन खड़ा करते समय उसके मुख (Front) की दिशा बहुत मायने रखती है। यह ऊर्जा के प्रवाह और आपकी अगली यात्रा के संकल्प को प्रभावित करती है।
| मुख की दिशा (Facing) | वास्तु फल | अनुशंसा |
|---|---|---|
| उत्तर (North) | अत्यंत शुभ | आर्थिक लाभ और सफलता। |
| पूर्व (East) | शुभ और सात्विक | मानसिक शांति और सुरक्षा। |
| पश्चिम (West) | सामान्य | व्यापारिक यात्राओं के लिए ठीक। |
| दक्षिण (South) | वर्जित | दुर्घटना और विवाद का भय। |
पार्किंग का फर्श घर के मुख्य फर्श से थोड़ा नीचा होना चाहिए। पार्किंग की छत मुख्य घर की छत को नहीं छूनी चाहिए, इसे स्वतंत्र रखना बेहतर है। पार्किंग की दीवारों के लिए **सफेद, हल्का ग्रे या नीला** रंग चुनें। पार्किंग एरिया में अंधेरा नहीं होना चाहिए; यहाँ पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रबंध अनिवार्य है।
अंत में, अपने वाहनों को हमेशा साफ रखें। पार्किंग के प्रवेश द्वार पर 'हनुमान जी' का चित्र या 'सुरक्षा कवच' लगाना यात्रा को निर्विघ्न बनाता है। यदि पार्किंग क्षेत्र छोटा है, तो वहां दर्पणों का प्रयोग न करें।