वास्तु शास्त्र - अध्याय २८ (अंतिम भाग)

अन्य कक्ष (Guest & Servant Rooms)

अतिथि सत्कार और सहायकों के साथ सामंजस्य

१. अतिथि कक्ष (Guest Room)

भारत में 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा है। वास्तु के अनुसार, मेहमानों के लिए **उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण)** दिशा सबसे उपयुक्त है। वायव्य कोण वायु तत्व का स्थान है, जो गतिशीलता को दर्शाता है। यहाँ रहने वाले मेहमान सुखद अनुभव करते हैं और समय पर विदा भी लेते हैं, जिससे घर की निजता बनी रहती है।

अतिथि कक्ष के प्रमुख नियम:

  • मेहमान का बिस्तर इस प्रकार हो कि सोते समय उनका सिर **दक्षिण या पूर्व** की ओर रहे।
  • अतिथि कक्ष में भारी अलमारी दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर होनी चाहिए।
  • इस कमरे का दरवाजा मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए।

२. सेवक कक्ष (Servant Quarter)

घर के सहायकों या नौकरों का कमरा उनके व्यवहार और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। नौकरों के रहने के लिए **दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण)** या **उत्तर-पश्चिम (वायव्य)** दिशा उत्तम है।

क्षेत्र उपयुक्त दिशा वास्तु कारण
सेवक कक्ष दक्षिण-पूर्व / उत्तर-पश्चिम सक्रियता और अनुशासन
सेवक का मुख (सोते समय) पूर्व या दक्षिण मानसिक स्वास्थ्य
कमरे का फर्श स्तर मुख्य घर के बराबर समान ऊर्जा प्रवाह

सावधानी:

सेवक कक्ष कभी भी **उत्तर-पूर्व (ईशान)** या **दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)** में नहीं होना चाहिए। ईशान में नौकर रखने से वे घर के स्वामी की बात नहीं मानते और नैऋत्य में रखने से वे स्वयं को मालिक समझने लगते हैं।

३. बहुउद्देशीय/योग कक्ष (Yoga & Hobby Room)

यदि आप घर में योग, ध्यान या किसी शौक (Hobby) के लिए अलग कमरा चाहते हैं, तो **उत्तर-पूर्व (ईशान)** सबसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान है। यहाँ की गई साधना और रचनात्मक कार्य शीघ्र फलदायी होते हैं।

इसके साथ ही आपके संपूर्ण 'वास्तु विशेषज्ञ' प्रोजेक्ट की सभी २८ फाइलें सफलतापूर्वक पूर्ण हुई हैं।