वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को 'कुबेर' की दिशा माना गया है। यह दिशा धन, समृद्धि, करियर और नए अवसरों का प्रतिनिधित्व करती है। उत्तर दिशा का स्वामी बुध ग्रह है, जो बुद्धि और व्यापार का कारक है। इस दिशा को हमेशा खुला, साफ और हल्का रखना चाहिए ताकि घर में धन का आगमन सुचारू रूप से हो सके।
उत्तर दिशा में महत्व: उत्तर दिशा में हल्का अखबार रैक रखना शुभ है क्योंकि यह सूचना और ज्ञान के प्रवाह को दर्शाता है।
| दिशा | लाभदायक (%) | हानिकारक (%) | ऊर्जा / प्रभाव विवरण |
|---|---|---|---|
| उत्तर (North) | 100% | 0% | सकारात्मक ऊर्जा। नए व्यापारिक समाचार और अवसर मिलते हैं। |
| दक्षिण (South) | 0% | 80% | भारीपन। अफवाहों का शिकार होना, मानसिक तनाव। |
| नैऋत्य (SW) | 0% | 90% | स्थिरता में कमी। घर के मुखिया को गलत सूचनाएं मिलना। |
| पश्चिम (West) | 40% | 30% | मध्यम। लाभ के समाचार देर से मिलना। |
| ईशान (NE) | 90% | 5% | अत्यंत शुभ। सात्विक बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि। |
उत्तर दिशा में महत्व: उत्तर दिशा जल तत्व की दिशा है। यहाँ जल शोधक रखना अत्यंत शुभ और धन वृद्धि कारक है।
| दिशा | लाभदायक (%) | हानिकारक (%) | ऊर्जा / प्रभाव विवरण |
|---|---|---|---|
| उत्तर (North) | 100% | 0% | प्रचुर धन प्रवाह और शुद्ध विचार। |
| दक्षिण (South) | निरंक | 100% | अग्नि और जल का दोष। भारी आर्थिक नुकसान और कलह। |
| आग्नेय (SE) | निरंक | 95% | दुर्घटना और सेहत में गिरावट की संभावना। |
| वायव्य (NW) | 60% | 20% | परिवर्तनशील। अतिथियों का आगमन बढ़ता है। |
निर्देशानुसार अन्य वस्तुओं जैसे आभूषण, कंप्यूटर, लैपटॉप, महत्वपूर्ण दस्तावेज आदि को भी इसी प्रकार विस्तारित किया जा सकता है। उत्तर दिशा में इन वस्तुओं को रखने से कुबेर देव की कृपा बनी रहती है।