वास्तु शास्त्र में पुस्तकों को साक्षात 'सरस्वती' का रूप माना गया है। पुस्तकालय केवल लकड़ी की अलमारियां और कागज के पन्ने नहीं हैं, बल्कि यह विचारों का एक जीवंत ऊर्जा क्षेत्र (Vibrational Field) है। एक व्यवस्थित पुस्तकालय घर के सदस्यों की निर्णय लेने की क्षमता और दूरदर्शिता को विकसित करता है।
पुस्तकालय के निर्माण में 'आकाश तत्व' और 'पृथ्वी तत्व' का संतुलन आवश्यक है। ज्ञान सूक्ष्म है (आकाश) और पुस्तकें ठोस हैं (पृथ्वी)। इन दोनों का संतुलन ही व्यक्ति को विद्वान बनाता है।
वास्तु के अनुसार पुस्तकालय के लिए **पश्चिम (West)** दिशा को सबसे उत्तम माना गया है। वरुण देव की यह दिशा संचय और स्थायित्व का प्रतीक है।
पुस्तकालय कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में नहीं होना चाहिए, क्योंकि यहाँ रखी पुस्तकें भारीपन और मानसिक तनाव पैदा कर सकती हैं।
पुस्तकों की अलमारियां (Book-shelves) हमेशा **दक्षिण या पश्चिम** की दीवारों पर होनी चाहिए। उत्तर या पूर्व की दीवारें खाली या हल्की होनी चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा निर्बाध रूप से प्रवेश कर सके।
पुस्तकों को उनके विषय के अनुसार रखना भी वास्तु सम्मत है। धार्मिक पुस्तकों को सबसे ऊपरी शेल्फ पर रखना चाहिए। कानून, विज्ञान और दर्शन की पुस्तकें मध्य में और मनोरंजन या सामान्य ज्ञान की पुस्तकें नीचे के शेल्फ पर रखी जा सकती हैं।
पुस्तकालय के भीतर बैठने के लिए आरामदायक कुर्सी या सोफा **दक्षिण-पश्चिम** हिस्से में होना चाहिए, जिससे पढ़ते समय व्यक्ति का मुख **पूर्व या उत्तर** की ओर रहे। यह स्थिति स्मृति को तेज करती है और लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखती है।
पुस्तकालय में रोशनी आंखों पर दबाव डालने वाली नहीं होनी चाहिए। खिड़कियां उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए। रात के समय रोशनी का स्रोत (Light Source) उत्तर या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। झूमर या तेज रोशनी को कमरे के केंद्र में लगाने से बचें।
पुस्तकालय के लिए लकड़ी के रंग (Wood tones), हल्का भूरा, क्रीम या हल्का पीला रंग सबसे उपयुक्त है। ये रंग गंभीरता और स्थिरता के प्रतीक हैं। गहरे नीले या काले रंग के प्रयोग से बचें, क्योंकि ये ज्ञान के अर्जन में सुस्ती पैदा कर सकते हैं।
फटी हुई या पुरानी पुस्तकें जिन्हें अब नहीं पढ़ा जाता, उन्हें पुस्तकालय से हटा देना चाहिए। पुस्तकालय में कभी भी धूल नहीं जमनी चाहिए। यहाँ एक **नंदी** या **सरस्वती** की छोटी प्रतिमा रखना अत्यंत शुभ होता है। चंदन की खुशबू या धूप का प्रयोग यहाँ की बौद्धिक ऊर्जा को सक्रिय रखता है।