वास्तु शास्त्र विश्लेषण - अध्याय १३
ज्ञान, स्वास्थ्य और संस्कार का संगम
बच्चों के विकास के लिए 'पश्चिम' (West) दिशा को सबसे उपयुक्त माना गया है, क्योंकि यह दिशा सफलता और लाभ की है। इसके अतिरिक्त 'उत्तर-पश्चिम' (वायव्य) दिशा भी बच्चों के लिए शुभ है, क्योंकि वायु तत्व उनकी रचनात्मकता और संवाद कौशल को बढ़ाता है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) का कमरा छोटे बच्चों के लिए बहुत अच्छा होता है क्योंकि वहां का शांत वातावरण उनके मस्तिष्क को विकसित करने में सहायक होता है।
पढ़ाई की मेज कमरे के **उत्तर या पूर्व** हिस्से में होनी चाहिए। पढ़ते समय बच्चे का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर हो, इससे ग्रास्पिंग पावर (समझने की शक्ति) बढ़ती है। मेज के ठीक ऊपर कभी भी बीम या भारी रैक नहीं होना चाहिए, इससे बच्चे पर मानसिक दबाव बनता है।
बच्चों के सोने का स्थान इस प्रकार हो कि उनका सिर **पूर्व** दिशा की ओर रहे। पूर्व दिशा सूर्य की ऊर्जा है, जो स्मरण शक्ति बढ़ाती है। यदि बच्चा बहुत सक्रिय या शरारती है, तो उसे दक्षिण दिशा में सिर करके सुलाया जा सकता है ताकि उसके व्यवहार में स्थिरता आए।
बुद्धि और एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम। उत्तर की दीवारों पर करें।
प्रसन्नता और नई ऊर्जा का संचार करता है।
यदि बच्चा बहुत जिद्दी है, तो हल्का नीला रंग उसे शांत रखने में मदद करेगा।
बच्चों के कमरे में प्रेरक महापुरुषों की तस्वीरें, सरस्वती माता का चित्र या ग्लोब (Globe) रखना चाहिए। ग्लोब को उत्तर-पूर्व कोने में रखने से उन्हें नई चीजें सीखने की प्रेरणा मिलती है। कंप्यूटर और गैजेट्स को दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोने में रखें।
अंततः, बच्चों के कमरे की उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा खाली और साफ रखें। वहां एक क्रिस्टल पिरामिड रखने से पढ़ाई की नकारात्मकता दूर होती है और बच्चे का मन शांत रहता है।