वास्तु शास्त्र में आईने को एक ऊर्जा परावर्तक (Energy Reflector) माना जाता है। यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा भी सकता है और नकारात्मकता को भी आकर्षित कर सकता है।
सुगंध हमारे मन और घर के वातावरण को तुरंत प्रभावित करती है। वास्तु अनुसार यह शुक्र ग्रह को मजबूत करती है।
पेंट, ब्रश, कैनवास और क्राफ्ट सामग्री का संबंध रचनात्मकता से है।
सभी बिजली के उपकरणों का संबंध अग्नि तत्व से होता है।
| सामग्री | उपयुक्त दिशा | वास्तु प्रभाव |
|---|---|---|
| प्रोजेक्टर एवं स्क्रीन | उत्तर-पश्चिम या उत्तर | स्पष्टता और ज्ञान |
| एलईडी बल्ब / लाइट | पूर्व / उत्तर-पूर्व | सकारात्मक ऊर्जा का संचार |
| इमरजेंसी लाइट | दक्षिण-पूर्व (SE) | अग्नि कोण में उचित स्थान |
| एक्सटेंशन बोर्ड | दक्षिण-पूर्व | अग्नि तत्व का संतुलन |
हारमोनियम, गिटार, तबला, ढोलक आदि संगीत की सामग्रियां सरस्वती माता का प्रतीक हैं।
स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दवाइयों का गलत स्थान बीमारी को लंबा खींच सकता है।
सफाई की वस्तुओं को सही स्थान पर न रखने से घर में क्लेश और धन की हानि हो सकती है।
वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की वस्तुओं से निकलने वाली ऊर्जा का संतुलन है। जब आप अपने घर में एक छोटा सा आईना भी लगाते हैं, तो वह उस दिशा की ऊर्जा को दोगुना कर देता है।
रंगों का चयन: उत्तर दिशा के कमरों में हल्का नीला या हरा, पूर्व में सफेद या हल्का पीला, और दक्षिण में क्रीम या नारंगी रंगों का प्रयोग करें। डार्क मोड में सामग्री पढ़ते समय ध्यान दें कि वास्तु अनुसार घर की दीवारों पर बहुत अधिक गहरा काला या ग्रे रंग तनाव पैदा कर सकता है।
ऊर्जा का प्रवाह: घर के बीच का हिस्सा जिसे 'ब्रह्मस्थान' कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ कोई भी भारी फर्नीचर या शोकेस न रखें।