VASTU VIKAS - Interior Items
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1. आईना / शीशा (Mirror Vastu)

वास्तु शास्त्र में आईने को एक ऊर्जा परावर्तक (Energy Reflector) माना जाता है। यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा भी सकता है और नकारात्मकता को भी आकर्षित कर सकता है।

  • सही दिशा: आईना हमेशा उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाना चाहिए। इससे धन और समृद्धि बढ़ती है।
  • बचाव: दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर आईना लगाने से बचें, क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डालता है।
  • बेडरूम टिप्स: सोते समय शरीर का कोई भी हिस्सा आईने में नहीं दिखना चाहिए, वरना स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि है, तो रात में उसे ढंक दें।
  • आकार: वर्गाकार (Square) या आयताकार (Rectangular) आईना सर्वोत्तम है। गोल या अंडाकार से बचें।

2. इत्र एवं सुगंधित द्रव्य (Fragrances)

सुगंध हमारे मन और घर के वातावरण को तुरंत प्रभावित करती है। वास्तु अनुसार यह शुक्र ग्रह को मजबूत करती है।

  • उत्तर-पश्चिम (NW): यहां वायु तत्व होता है, इसलिए यहां एयर फ्रेशनर या डिफ्यूज़र रखना बहुत शुभ होता है।
  • मंदिर/पूजा कक्ष: यहां चंदन, केसर या चमेली की अगरबत्ती का उपयोग करें।
  • बेडरूम: दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए गुलाब या लेवेंडर की सुगंध का प्रयोग करें।

3. कला एवं पेंटिंग सामग्री (Art Materials)

पेंट, ब्रश, कैनवास और क्राफ्ट सामग्री का संबंध रचनात्मकता से है।

  • रखने की जगह: पेंटिंग का सामान दक्षिण-पूर्व (SE) या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
  • सफाई: सूखे ब्रश या टूटी हुई पैलेट न रखें, इससे रचनात्मक ऊर्जा रुकती है।
  • मिट्टी के शिल्प: मिट्टी से बनी कलाकृतियां दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा में स्थायित्व प्रदान करती हैं।

4. खिड़की एवं झूला (Windows & Swings)

  • खिड़कियाँ: घर में खिड़कियों की संख्या सम (Even) होनी चाहिए। उत्तर और पूर्व की खिड़कियाँ बड़ी होनी चाहिए ताकि पर्याप्त सूर्य प्रकाश आए।
  • झूला: घर में झूला उत्तर या पूर्व दिशा में होना सबसे अच्छा है। इसे इस तरह लगाएं कि झूलते समय मुख उत्तर या पूर्व की ओर रहे।

5. इलेक्ट्रॉनिक्स (Projector, LED, Emergency Light)

सभी बिजली के उपकरणों का संबंध अग्नि तत्व से होता है।

सामग्री उपयुक्त दिशा वास्तु प्रभाव
प्रोजेक्टर एवं स्क्रीन उत्तर-पश्चिम या उत्तर स्पष्टता और ज्ञान
एलईडी बल्ब / लाइट पूर्व / उत्तर-पूर्व सकारात्मक ऊर्जा का संचार
इमरजेंसी लाइट दक्षिण-पूर्व (SE) अग्नि कोण में उचित स्थान
एक्सटेंशन बोर्ड दक्षिण-पूर्व अग्नि तत्व का संतुलन

6. दीवार की घड़ियाँ एवं पेंटिंग्स

  • घड़ी: घड़ी हमेशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में लगाएं। यह समय के शुभ प्रवाह को सुनिश्चित करती है। कभी भी दक्षिण दिशा में घड़ी न लगाएं।
  • 7 घोड़ों की पेंटिंग: इसे व्यापारिक वृद्धि के लिए पूर्व दिशा की दीवार पर लगाएं। घोड़े अंदर की तरफ आते हुए दिखने चाहिए।
  • सीनरी: बहते पानी की तस्वीर उत्तर या पूर्व में लगाएं। पहाड़ों की पेंटिंग दक्षिण-पश्चिम में लगाएं।

7. वाद्य यंत्र (Musical Instruments)

हारमोनियम, गिटार, तबला, ढोलक आदि संगीत की सामग्रियां सरस्वती माता का प्रतीक हैं।

  • स्थान: इन्हें उत्तर-पूर्व (NE) या उत्तर दिशा में रखना चाहिए।
  • सावधानी: इन्हें कभी भी गंदा न रखें और न ही दक्षिण-पश्चिम के कोनों में दबाकर रखें। नियमित अभ्यास से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

8. दवाइयाँ एवं स्वास्थ्य उपकरण (Health & Medical Items)

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दवाइयों का गलत स्थान बीमारी को लंबा खींच सकता है।

  • प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid): इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व (NE) दिशा में रखें। यह दिशा 'आरोग्य' की है।
  • दवाइयाँ (Medicines): दवाइयों को कभी भी रसोई घर (Kitchen) में न रखें, इससे बीमारी बार-बार आती है। इन्हें उत्तर-पूर्व में रखने से दवा जल्दी असर करती है।
  • स्वास्थ्य उपकरण (BP Machine, Oximeter, Nebulizer): इन्हें उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में व्यवस्थित अलमारी में रखें।
  • ऑर्थोपेडिक सपोर्ट (Belt, Braces): इन्हें दक्षिण-पश्चिम (SW) में रखें क्योंकि यह भारी सामान और स्थिरता की दिशा है।
  • वैसाखी एवं व्हीलचेयर: इन्हें हमेशा दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखें। इन्हें कभी भी मुख्य द्वार के सामने न रखें।

9. डाइनिंग टेबल एवं शोकेस (Dining & Furniture)

  • डाइनिंग टेबल: घर में डाइनिंग टेबल के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा सर्वोत्तम है। भोजन करते समय मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।
  • शोकेस: भारी शोकेस को हमेशा दक्षिण या पश्चिम की दीवारों पर बनाना चाहिए। इसमें रखी वस्तुएं व्यवस्थित हों।
  • पुष्प पात्र (Flower Vases): ताजे फूलों का गुलदस्ता उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। सूखे या मुरझाए फूल तुरंत हटा दें, वे नकारात्मकता फैलाते हैं।

10. सफाई एवं स्वच्छता (Cleaning & Hygiene)

सफाई की वस्तुओं को सही स्थान पर न रखने से घर में क्लेश और धन की हानि हो सकती है।

  • झाड़ू एवं पोंछा (Mop): झाड़ू और पोंछे को कभी भी ईशान कोण (NE) में न रखें। इन्हें हमेशा दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में छिपाकर रखें।
  • डिटर्जेंट, कॉलिन, फिनाइल: इन रसायनों को उत्तर-पश्चिम (NW) दिशा में रखें।
  • लॉन्ड्री बास्केट: गंदे कपड़ों की टोकरी उत्तर-पश्चिम दिशा में रखनी चाहिए।
  • शू रैक: जूतों का स्टैंड कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने या उत्तर-पूर्व में न हो। इसे पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में रखें।
  • शौच सामग्री (Soap, Loofah): बाथरूम के सामान को उत्तर या पूर्व के कोनों में व्यवस्थित रैक में रखें।

11. स्मार्ट डिवाइस एवं सुरक्षा (Smart Devices & Security)

  • अलेक्सा एवं डिजिटल असिस्टेंट: इन्हें उत्तर-पश्चिम (वायु कोण) में रखें, जो संचार की दिशा है।
  • डिजिटल लॉकर: इसे हमेशा दक्षिण-पश्चिम (SW) कोने की अलमारी में इस तरह रखें कि खुलते समय इसका मुख उत्तर की ओर हो।
  • टेलीफोन: लैंडलाइन या कॉर्डलेस फोन के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा सबसे उपयुक्त है।
  • वैक्यूम क्लीनर: इसे दक्षिण-पूर्व (SE) या पश्चिम दिशा के स्टोर रूम में रखें।

12. चक्र एवं विविध सामान (Vastu Chakra & Misc)

  • सुदर्शन चक्र / वास्तु चक्र: इसे घर के ब्रह्मस्थान (केंद्र) या मुख्य द्वार के ऊपर अंदर की ओर लगाना अत्यंत प्रभावशाली होता है। यह घर की सुरक्षा करता है।
  • वजन मशीन: इसे पश्चिम दिशा में रखें।
  • छाता एवं टॉर्च: इन्हें उत्तर-पश्चिम दिशा के पास किसी कैबिनेट में रखें।
  • एग्जॉस्ट फैन: रसोई या बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन हमेशा दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम की दीवार पर होना चाहिए।

वास्तु सुझाव: आंतरिक सज्जा (Interior Decoration)

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की वस्तुओं से निकलने वाली ऊर्जा का संतुलन है। जब आप अपने घर में एक छोटा सा आईना भी लगाते हैं, तो वह उस दिशा की ऊर्जा को दोगुना कर देता है।

रंगों का चयन: उत्तर दिशा के कमरों में हल्का नीला या हरा, पूर्व में सफेद या हल्का पीला, और दक्षिण में क्रीम या नारंगी रंगों का प्रयोग करें। डार्क मोड में सामग्री पढ़ते समय ध्यान दें कि वास्तु अनुसार घर की दीवारों पर बहुत अधिक गहरा काला या ग्रे रंग तनाव पैदा कर सकता है।

ऊर्जा का प्रवाह: घर के बीच का हिस्सा जिसे 'ब्रह्मस्थान' कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ कोई भी भारी फर्नीचर या शोकेस न रखें।