वास्तु शास्त्र के अनुसार, बगीचा केवल मनोरंजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह हमारे घर के चारों ओर 'प्राण ऊर्जा' (Pranic Energy) का एक सुरक्षा घेरा है। पेड़-पौधे पंचतत्वों में से 'पृथ्वी' और 'वायु' तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक सही दिशा में बना बगीचा घर के वास्तु दोषों को सोखने की क्षमता रखता है।
बगीचे की हरियाली हमारे मानसिक स्वास्थ्य और तनाव को कम करने में सहायक होती है। वास्तु पुरुष मंडल में वनस्पतियों का संबंध बुध और चंद्रमा से माना गया है, जो बुद्धि और मन के कारक हैं।
बगीचे के लिए उत्तर (North) और पूर्व (East) दिशा को सर्वोत्तम माना गया है।
पौधों का चयन करते समय उनकी प्रकृति का ध्यान रखना आवश्यक है। उत्तर-पूर्व (ईशान) में छोटे और पवित्र पौधे जैसे तुलसी, पुदीना, धनिया और छोटे फूल वाले पौधे होने चाहिए।
वास्तु शास्त्र कुछ विशिष्ट प्रकार के पौधों को घर के बगीचे में लगाने से मना करता है। कांटेदार पौधे (गुलाब को छोड़कर) जैसे कैक्टस, घर में तनाव और विवाद पैदा करते हैं। जिन पौधों को काटने पर दूध जैसा पदार्थ निकलता हो, वे स्वास्थ्य और धन के लिए हानिकारक माने जाते हैं।
पीपल और बरगद के पेड़ को घर की सीमा के अंदर नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इनकी जड़ें दूर तक फैलकर नींव को नुकसान पहुँचाती हैं और इन्हें मंदिर परिसर के लिए उपयुक्त माना गया है।
यदि आप बगीचे में छोटा फव्वारा (Fountain) या मछली कुंड बनाना चाहते हैं, तो उसे हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में ही रखें। पानी का प्रवाह घर की ओर होना चाहिए न कि बाहर की ओर। बहता हुआ पानी निरंतर समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन ध्यान रहे कि पानी कभी गंदा या रुका हुआ न हो।
बगीचे में बैठने के लिए बेंच या झूला दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए। बगीचे के रास्तों (Walkway) के लिए प्राकृतिक पत्थरों का प्रयोग करें। यहाँ बहुत अधिक कंक्रीट का उपयोग करने से पृथ्वी तत्व की ऊर्जा बाधित होती है।
रात के समय बगीचा पूरी तरह अंधेरे में नहीं होना चाहिए। दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोण में ऊंचे खंभे पर लाइट लगाना शुभ होता है। पेड़ों के नीचे नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली लाइट (Up-lighting) एक विशेष सकारात्मक वातावरण निर्मित करती है।
सूखे पत्ते और मुरझाए हुए फूल नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं। बगीचे की नियमित सफाई होनी चाहिए। यदि कोई पेड़ सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का स्थान उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में बनाएं, इससे घर में खुशहाली आती है।