किसी भी उद्योग की सफलता केवल उसकी मशीनरी या पूंजी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस स्थान की ऊर्जा पर भी निर्भर करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्ट्री का लेआउट तैयार करने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है और अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं।
वास्तु के अनुसार फैक्ट्री के लिए वर्गाकार या आयताकार भूखंड सबसे उत्तम माना जाता है। शेरमुखी (सामने से चौड़ा और पीछे से संकरा) भूखंड व्यावसायिक कार्यों के लिए शुभ होता है।
| विभाग | वास्तु सम्मत दिशा |
|---|---|
| भारी मशीनरी | दक्षिण-पश्चिम (नैर्ऋत्य) |
| कच्चा माल (Raw Material) | दक्षिण या पश्चिम |
| तैयार माल (Finished Goods) | उत्तर-पश्चिम (वायव्य) |
| भट्टी या बॉयलर (Fire Element) | दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) |
| प्रशासनिक कार्यालय | उत्तर या पूर्व |
फैक्ट्री का मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान) या पूर्व दिशा में होना सबसे लाभकारी माना जाता है। यह दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का मार्ग हैं। यदि प्रवेश द्वार दक्षिण में रखना मजबूरी हो, तो उसे दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) की ओर खिसका कर बनाना चाहिए।
मशीनों का भार फैक्ट्री के दक्षिण-पश्चिम (नैर्ऋत्य) हिस्से में होना चाहिए। यहाँ मशीनें रखने से उत्पादन में स्थिरता आती है। मशीनों को कभी भी उत्तर-पूर्व कोने में न रखें, क्योंकि यह कोना हल्का और साफ सुथरा रहना चाहिए।
बिजली का मीटर, ट्रांसफार्मर, जनरेटर, बॉयलर और भट्टी जैसी चीजें दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में होनी चाहिए। यह दिशा अग्नि देव की है, जो ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। यहाँ रखे गए अग्नि यंत्र फैक्ट्री में दुर्घटनाओं को कम करते हैं।
बोरवेल, भूमिगत जल टैंक या कुआं उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में होना चाहिए। छत पर रखी जाने वाली पानी की टंकी (Overhead Tank) को दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
तैयार माल को उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में रखना चाहिए। वायु की इस दिशा में सामान रखने से माल की बिक्री जल्दी होती है और स्टॉक जमा नहीं रहता।
श्रमिकों के रहने का स्थान उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में हो सकता है। शौचालय कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान) या केंद्र (ब्रह्मस्थान) में नहीं होना चाहिए। इसके लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा उपयुक्त है।
फैक्ट्री के मालिक या एमडी का केबिन दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और बैठते समय उनका मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि उनका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे।
फैक्ट्री से निकलने वाला कचरा या स्क्रैप दक्षिण-पश्चिम कोने में जमा किया जाना चाहिए। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व में न रखें, अन्यथा व्यापार में आर्थिक हानि हो सकती है।
सुरक्षा गार्ड का कमरा मुख्य द्वार के पास होना चाहिए, लेकिन वह मुख्य द्वार के एकदम सामने नहीं होना चाहिए। इसे उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में बनाया जा सकता है।
वाहनों की पार्किंग के लिए उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा उत्तम है। भारी वाहनों को फैक्ट्री के दक्षिण या पश्चिम हिस्से में पार्क करना चाहिए।
फैक्ट्री परिसर में बड़े और भारी पेड़ दक्षिण और पश्चिम दिशा में लगाने चाहिए। छोटे पौधे और घास का मैदान उत्तर या पूर्व दिशा में रखा जा सकता है।