वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का 'मुख' माना गया है। जैसे मानव शरीर को पोषण मुख से प्राप्त होता है, वैसे ही घर की सुख-शांति, समृद्धि और ऊर्जा का पोषण मुख्य द्वार से होता है। इसे 'महाद्वार' भी कहा जाता है। मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं है, बल्कि यह वह संधि स्थल है जहाँ बाहरी जगत की ऊर्जा घर की आंतरिक ऊर्जा से मिलती है।
यदि मुख्य द्वार वास्तु सम्मत है, तो घर में रहने वालों का मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और आपसी संबंध मधुर रहते हैं। इसके विपरीत, दोषपूर्ण द्वार जीवन में संघर्ष और बीमारियों का कारण बन सकता है।
वास्तु पुरुष मंडल के 32 पदों में से कुछ विशिष्ट पद ही द्वार के लिए सर्वोत्तम होते हैं। मुख्य द्वार हमेशा किसी दिशा के मध्य में न होकर, थोड़ा दाहिनी या बाईं ओर खिसका हुआ (विशिष्ट पदों पर) होना चाहिए।
मुख्य द्वार का आकार घर के अन्य सभी दरवाजों से बड़ा होना चाहिए। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई का अनुपात 2:1 होना चाहिए। द्वार के लिए लकड़ी का प्रयोग करना सर्वोत्तम है, विशेषकर सागवान, शीशम या नीम।
वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार पर 'देहली' या दहलीज का होना अनिवार्य है। दहलीज जमीन से 1-2 इंच ऊँची होनी चाहिए। यह न केवल धूल और कीड़ों को रोकती है, बल्कि घर की लक्ष्मी को बाहर जाने से और बाहरी नकारात्मक शक्तियों को अंदर आने से भी रोकती है। दहलीज पर चांदी का तार दबाना या तांबे का प्रयोग करना अत्यंत प्रभावशाली वास्तु उपचार है।
मुख्य द्वार पर पर्याप्त प्राकृतिक और कृत्रिम प्रकाश होना चाहिए। द्वार के ऊपर एक चमकीला बल्ब होना चाहिए जो रात में सौभाग्य के मार्ग को प्रकाशित करे। ध्यान रहे कि किसी अन्य भवन, पेड़ या खंभे की छाया मुख्य द्वार पर न पड़े, जिसे 'छाया वेध' कहा जाता है।
द्वार पर मंगल कलश, स्वास्तिक, ॐ और देवी लक्ष्मी के चरणों के चिन्ह लगाना शुभ होता है। मुख्य द्वार के ठीक ऊपर 'वास्तु पुरुष' या 'पंचमुखी हनुमान' का चित्र (यदि दक्षिण द्वार है) लगाने से सुरक्षा चक्र निर्मित होता है। द्वार के दोनों ओर ताजे पानी से भरा बर्तन (कलश) और फूल रखना सकारात्मकता को आकर्षित करता है।
मुख्य द्वार के ठीक सामने कभी भी शौचालय, सीढ़ियां या रसोई घर नहीं होना चाहिए। द्वार खोलते ही सामने दर्पण (Mirror) नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह आने वाली ऊर्जा को वापस बाहर की ओर परावर्तित कर देता है। द्वार के पास कूड़ेदान या कबाड़ रखना दरिद्रता को आमंत्रण देना है।
रोज सुबह मुख्य द्वार को साफ करना और वहां रंगोली या हल्दी से स्वास्तिक बनाना घर में शांति लाता है। शाम को द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। द्वार के कब्जों से कभी आवाज नहीं आनी चाहिए, यह घर में कलह का कारण बनती है।