वास्तु शास्त्र में अग्नि तत्व का विशेष महत्व है। इन्वर्टर और उसकी बैटरी ऊर्जा का स्रोत हैं और इनमें विद्युत अग्नि प्रवाहित होती है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में कभी भी भारी बैटरी या इन्वर्टर न रखें, इससे मानसिक तनाव और आर्थिक हानि हो सकती है।
सोलर पैनल सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित करते हैं। अतः इनका मुख और स्थान सूर्य की गति के अनुसार होना चाहिए।
जनरेटर शोर और भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, इसलिए इनका वास्तु अत्यंत संवेदनशील है।
जनरेटर को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में खुला स्थान देकर रखना चाहिए। इसे उत्तर या ईशान दिशा में रखने से वंश वृद्धि में बाधा आ सकती है।
यह पूरे घर की ऊर्जा का नियंत्रण केंद्र है।
इनका उपयोग उपकरणों की सुरक्षा के लिए होता है। इन्हें संबंधित उपकरण (जैसे फ्रिज या एसी) के दक्षिण या पश्चिम दिशा में स्थापित करें।
आजकल के छोटे उपकरण भी वास्तु को प्रभावित करते हैं। चार्जर यूनिट्स को शयनकक्ष के दक्षिण-पूर्व कोने में व्यवस्थित रखें।
औद्योगिक इकाइयों या बड़े बंगलों में ट्रांसफॉर्मर की स्थिति व्यवसाय की उन्नति तय करती है।
हमेशा परिसर के बाहरी दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में इसे स्थापित करें। यदि यह उत्तर दिशा में है, तो यह भारी 'वास्तु दोष' उत्पन्न करता है जिसे पिरामिड या वास्तु यंत्रों से ठीक करना आवश्यक है।
ऊर्जा उपकरणों का सही स्थान न केवल बिजली की बचत करता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। यदि आपके उपकरण गलत दिशा में हैं, तो उनके नीचे लाल रंग का मैट बिछाकर अग्नि तत्व को संतुलित किया जा सकता है।