पुस्तकालय और अध्ययन सामग्री (Library & Books)
पुस्तकों का संबंध ज्ञान और बुध-गुरु ग्रहों से होता है। अध्ययन कक्ष या पुस्तकालय की सही दिशा व्यक्ति की बुद्धि और निर्णय क्षमता तय करती है।
1. सर्वश्रेष्ठ स्थान: अध्ययन कक्ष या पुस्तकों का संग्रह हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पश्चिम (West) दिशा में होना चाहिए। ईशान कोण में अध्ययन करने से एकाग्रता बढ़ती है।
2. अध्ययन की दिशा: पढ़ते समय छात्र का मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है।
3. रैक की बनावट: पुस्तकों की रैक कभी भी सिर के ठीक ऊपर (बेड के पीछे) नहीं होनी चाहिए। इससे मानसिक दबाव बढ़ता है। रैक को हमेशा दीवार के सहारे दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
4. सफाई: पुस्तकालय में धूल जमा होना ज्ञान की ऊर्जा को बाधित करता है। अनुपयोगी और फटी हुई पुस्तकें घर में नकारात्मकता लाती हैं।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
सही दिशा में पुस्तकालय होने से घर में शैक्षणिक सफलता आती है, एकाग्रता बढ़ती है और भविष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टि प्राप्त होती है।
रेफ्रिजरेटर / फ्रिज (Refrigerator)
फ्रिज जल और अग्नि दोनों का मिश्रण है क्योंकि यह ठंडा करता है लेकिन इसके पीछे से गर्मी निकलती है।
1. उपयुक्त दिशा: फ्रिज रखने के लिए दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) का पश्चिमी भाग या पश्चिम दिशा सबसे अच्छी है।
2. वर्जित स्थान: फ्रिज को कभी भी ईशान कोण (North-East) में नहीं रखना चाहिए। यहाँ फ्रिज होने से परिवार के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ते हैं। इसे सीधे दक्षिण दिशा की दीवार से सटाकर भी न रखें।
3. कोनों से दूरी: फ्रिज को दीवार के कोनों से कम से कम 6 इंच दूर रखना चाहिए ताकि इसकी गर्मी आसानी से बाहर निकल सके।
4. ताज़गी: फ्रिज में सड़ा-गला भोजन राहु दोष पैदा करता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
सही स्थान पर फ्रिज होने से भोजन की सात्विकता बनी रहती है और घर में अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है।
एसी और कूलर (Air Conditioner / Cooler)
एसी और कूलर वायु तत्व और जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
1. सर्वश्रेष्ठ दिशा: एसी या कूलर लगाने के लिए उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) दिशा सर्वोत्तम है। यह वायु की दिशा है जो शीतलता को पूरे घर में सही तरह से फैलाती है।
2. वैकल्पिक स्थान: इन्हें उत्तर या पूर्व की दीवार पर भी लगाया जा सकता है।
3. वर्जित स्थान: इन्हें कभी भी दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में नहीं लगाना चाहिए, वरना इनका प्रभाव कम होगा और मशीन बार-बार खराब होगी।
4. ऊँचाई: एसी को खिड़की के स्तर से ऊपर लगाना वास्तु सम्मत है क्योंकि ठंडी हवा ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित होती है।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
सही दिशा में एसी होने से घर का वातावरण शांत रहता है और निवासियों को गहरी तथा तनावमुक्त नींद आती है।
टेलीविज़न और मनोरंजन तंत्र (Television/LED)
टीवी एक ऐसा उपकरण है जो निरंतर ध्वनि और प्रकाश उत्सर्जित करता है, जिससे घर की शांति प्रभावित होती है।
1. सर्वश्रेष्ठ दिशा: टीवी को हमेशा कमरे की पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। इससे देखते समय व्यक्ति का मुख शुभ दिशा में रहता है।
2. वर्जित स्थान: टीवी को दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोने में कभी न रखें। यह परिवार के सदस्यों को आलसी बनाता है और मानसिक तनाव का कारण बनता है।
3. बेडरूम में टीवी: यदि बेडरूम में टीवी है, तो सोते समय उसे किसी कपड़े से ढंक दें ताकि उसकी स्क्रीन दर्पण (Mirror) की तरह काम न करे। टीवी का प्रतिबिंब बेड पर पड़ना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
4. ध्वनि: टीवी की आवाज बहुत तेज नहीं होनी चाहिए, क्योंकि शोर वास्तु दोष (ध्वनि प्रदूषण) पैदा करता है।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
सही दिशा में टीवी होने से परिवार में ज्ञानवर्धक चर्चाएँ होती हैं और सामाजिक संबंधों में सुधार आता है।
दवाइयाँ और फर्स्ट एड (Medicines/Health Kit)
दवाइयाँ कहाँ रखी हैं, यह तय करता है कि व्यक्ति कितनी जल्दी ठीक होगा।
1. हीलिंग जोन: दवाइयाँ हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखनी चाहिए। यह दिशा चिकित्सा और स्वास्थ्य लाभ (Healing) के लिए सबसे शक्तिशाली है।
2. वर्जित स्थान: दवाइयों को कभी भी किचन में या चूल्हे के पास न रखें। अग्नि के प्रभाव से दवाइयां अपना असर खो सकती हैं और बीमारी घर में स्थायी रूप ले सकती है।
3. अंधकार: दवाइयों को कभी भी अंधेरी जगह या कबाड़ के पास न रखें। इन्हें साफ-सुथरे बॉक्स में सलीके से रखना चाहिए।
4. समय सीमा: एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां तुरंत फेंक देनी चाहिए, ये शनि और राहु का भारी दोष पैदा करती हैं।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
ईशान में रखी दवाइयां जल्दी असर करती हैं और व्यक्ति को दीर्घायु तथा निरोगी काया प्रदान करने में सहायक होती हैं।
जूता रैक और फुटवियर (Shoe Rack)
जूते बाहर की गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं, इसलिए इनका स्थान बहुत सोच-समझकर चुनना चाहिए।
1. उपयुक्त दिशा: जूते रखने के लिए पश्चिम (West) या उत्तर-पश्चिम (NW) दिशा श्रेष्ठ है। यह विसर्जन की दिशाएं हैं।
2. वर्जित स्थान: जूतों को कभी भी ईशान कोण (NE) या मुख्य द्वार के बिल्कुल सामने न रखें। ईशान में जूते रखना साक्षात लक्ष्मी का अपमान और बुद्धि का नाश है।
3. बंद रैक: हमेशा बंद जूतों की रैक (Shoe Cabinet) का उपयोग करें। खुले में बिखरे हुए जूते घर में कलह और मानसिक अशांति पैदा करते हैं।
4. मंदिर से दूरी: पूजा घर के आसपास या उसकी दीवार से सटाकर कभी भी जूते न रखें।
जीवन और ऊर्जा पर प्रभाव:
सही स्थान पर जूतों का रैक होने से घर की पवित्रता बनी रहती है और बाहर की नकारात्मकता अंदर प्रवेश नहीं कर पाती।