VASTU VIKAS - पूर्व (East)
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पूर्व दिशा (East Direction) का संपूर्ण वास्तु विश्लेषण

वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को 'उदय' की दिशा माना जाता है। यह दिशा पितृ, मान-सम्मान और स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ की सकारात्मक ऊर्जा पूरे भवन को जीवंत बनाती है।

1. आवासीय घर और फार्महाउस

घर में पूर्व दिशा का स्थान सूर्य देव का होता है।

2. कार्यालय, बैंक और सरकारी कार्यालय

प्रशासनिक कार्यों के लिए पूर्व दिशा अत्यंत प्रभावशाली है।

3. फैक्ट्री, उद्योग और गोदाम

औद्योगिक क्षेत्रों में पूर्व दिशा को ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।

4. अस्पताल, क्लिनिक और योग केंद्र

चूंकि सूर्य आरोग्य का कारक है, इसलिए स्वास्थ्य संस्थानों में इसका महत्व बढ़ जाता है।

5. विद्यालय, पुस्तकालय और कोचिंग केंद्र

शिक्षा और ज्ञान के प्रसार के लिए पूर्व दिशा वरदान स्वरूप है।

6. होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल

व्यापारिक सफलता के लिए पूर्व दिशा का खुला होना ग्राहकों को आकर्षित करता है।

7. ब्यूटी पार्लर, जिम और मीडिया स्टूडियो

ग्लैमर और संचार के क्षेत्रों में भी पूर्व दिशा का गहरा प्रभाव है।

8. मंदिर, गौशाला और पेट्रोल पंप

मंदिर: पूर्व दिशा देवताओं की दिशा है, यहाँ पूजा घर होना सुख-शांति लाता है।
गौशाला: गायों का मुख पूर्व की ओर होने से वे स्वस्थ और अधिक दुधारू रहती हैं।
पेट्रोल पंप: तेल के टैंक पूर्व या उत्तर में होने चाहिए।

पूर्व दिशा के दोष और उपचार

यदि पूर्व दिशा में भारी निर्माण, शौचालय या कूड़ा-करकट हो, तो यह 'वास्तु दोष' पैदा करता है। इससे सामाजिक अपमान, पिता से अनबन और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उपचार के रूप में यहाँ सूर्य यंत्र स्थापित करें और इस क्षेत्र को खाली करें।