VASTU VIKAS - dispensery
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नमस्ते! औषधालय (डिस्पेंसरी) के लिए वास्तु का सही होना न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य लाभ के लिए भी आवश्यक है। नीचे दी गई जानकारी का अध्ययन कर आप अपनी डिस्पेंसरी को वास्तु सम्मत बना सकते हैं।

1. डिस्पेंसरी का मुख्य द्वार (Main Entrance)

वास्तु शास्त्र के अनुसार, डिस्पेंसरी का प्रवेश द्वार सदैव पूर्व (East), उत्तर (North) या ईशान कोण (North-East) में होना चाहिए। ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं। यदि द्वार इन दिशाओं में होता है, तो औषधालय में आने वाले रोगियों में मनोवैज्ञानिक रूप से शीघ्र स्वस्थ होने का विश्वास जाग्रत होता है।

2. दवाओं का भंडारण (Medicine Racks)

दवाइयों को रखने के लिए उत्तर-पश्चिम (North-West) यानी वायव्य कोण सबसे उपयुक्त है। इस दिशा का संबंध वायु तत्व से है, जो दवाओं के स्टॉक के निरंतर रोटेशन (बिक्री) में सहायक होता है। स्टॉक कभी भी दक्षिण-पश्चिम में न रखें, अन्यथा दवाएं पुरानी होकर खराब हो सकती हैं या उनकी बिक्री धीमी हो सकती है।

विशेष टिप: आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी-बूटियों के लिए उत्तर दिशा का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि यहाँ से मिलने वाली चुंबकीय ऊर्जा दवाओं की शुद्धता बनाए रखती है।

3. डॉक्टर का परामर्श कक्ष (Doctor's Cabin)

चिकित्सक को सदैव नैऋत्य कोण (South-West) में बैठना चाहिए। बैठते समय डॉक्टर का मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। मरीज की बैठने की व्यवस्था डॉक्टर के दाईं ओर होनी चाहिए। यह स्थिति डॉक्टर को आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने (Diagnosis) की शक्ति प्रदान करती है।

4. प्रतीक्षा क्षेत्र (Waiting Area)

मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों के बैठने की जगह उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। यहाँ बैठने से मरीज तनावमुक्त महसूस करते हैं। ध्यान रहे कि प्रतीक्षा क्षेत्र में दीवारों पर रंग हल्का और शांत (जैसे हल्का नीला या हरा) होना चाहिए।

5. कैश काउंटर (Cash Counter)

डिस्पेंसरी में कैश काउंटर को उत्तर या पूर्व की दीवार के साथ बनाना चाहिए। पैसा रखते समय गल्ले (Cash Box) का मुख उत्तर की ओर खुलना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और फिजूलखर्ची कम होती है।

6. जल और स्वच्छता (Drinking Water & Washroom)

पीने के पानी का स्थान सदैव ईशान कोण (North-East) में रखें। शौचालय (Washroom) का निर्माण पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में करना चाहिए। ईशान कोण में भूलकर भी शौचालय न बनाएं, क्योंकि यह गंभीर वास्तु दोष है जो संस्थान की प्रगति रोक सकता है।

7. रंग और प्रकाश व्यवस्था (Color & Lighting)

स्वास्थ्य केंद्र में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। प्राकृतिक रोशनी का आना बहुत शुभ होता है। रंगों की बात करें तो सफेद, हल्का हरा या क्रीम रंग सबसे उपयुक्त हैं। ये रंग शांति और आरोग्य के प्रतीक हैं। गहरे और उत्तेजक रंगों से परहेज करें।

8. बिजली के उपकरण (Electrical Items)

डिस्पेंसरी में रखे जाने वाले फ्रिज (इंसुलिन/इंजेक्शन के लिए), इनवर्टर, कंप्यूटर या अन्य लैब उपकरण दक्षिण-पूर्व (South-East) यानी आग्नेय कोण में रखे जाने चाहिए। यह अग्नि की दिशा है जो मशीनों की कार्यक्षमता बनाए रखती है।

9. प्राथमिक उपचार कक्ष (First Aid & Dressing)

ड्रेसिंग या छोटे-मोटे उपचार के लिए उत्तर-पूर्व या उत्तर का भाग उपयोग में लाएं। यहाँ उपचार करने से घाव जल्दी भरते हैं।

10. औषधीय पौधे (Healing Plants)

यदि स्थान उपलब्ध हो, तो डिस्पेंसरी के बाहर या ईशान कोण में तुलसी, नीम और एलोवेरा के पौधे लगाएं। ये पौधे हवा को शुद्ध करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करते हैं।

निष्कर्ष: यदि आप इन वास्तु नियमों का पालन करते हैं, तो आपकी डिस्पेंसरी न केवल आर्थिक रूप से फलप्रद होगी, बल्कि मानवता की सेवा का एक उत्कृष्ट केंद्र भी बनेगी।

वास्तु पुरुष मंडल के 45 देवताओं के अनुसार, औषधालय में 'अदिति' और 'दिति' के पदों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जो उत्तर-पूर्व के करीब होते हैं। यहाँ किसी भी प्रकार का भारी निर्माण संस्थान की ऊर्जा को अवरुद्ध कर सकता है। ब्रह्मस्थान (केंद्र) को हमेशा खाली रखें ताकि ऊर्जा का स्वतंत्र प्रवाह हो सके।

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