मंदिर / पूजा स्थल (Divine Pooja Mandir)
घर का मंदिर संपूर्ण भवन का ऊर्जा केंद्र होता है। इसकी स्थिति पूरे परिवार के भाग्य को प्रभावित करती है।
1. सर्वश्रेष्ठ दिशा: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए। यह दिशा 'गुरु' और ईश्वर का स्थान है। यहाँ मंदिर होने से घर में सात्विक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
2. पूजन का मुख: पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व की ओर मुख करने से ज्ञान और उत्तर की ओर मुख करने से धन की प्राप्ति होती है।
3. मंदिर की बनावट: लकड़ी का मंदिर (शीशम या सागवान) सबसे उत्तम माना जाता है। मंदिर के ऊपर एक गुंबद या शिखर होना चाहिए जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करता है।
4. निषेध: मंदिर कभी भी शौचालय के ऊपर, नीचे या उसके साथ वाली दीवार पर नहीं होना चाहिए। बेडरूम में मंदिर रखने से बचें; यदि विवशता हो, तो सोते समय मंदिर पर पर्दा अवश्य डालें।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
ईशान कोण का मंदिर घर के सदस्यों को मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक शांति और हर कार्य में ईश्वरीय सहायता प्रदान करता है।
मूर्तियाँ और धार्मिक चिह्न (Idols/Divine Symbols)
मूर्तियां केवल सजावट नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत होती हैं।
1. मूर्तियों का आकार: घर के मंदिर में कभी भी अंगूठे से बड़ी या 9 इंच से ऊंची मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। बहुत बड़ी मूर्तियां केवल मंदिरों (Public Temples) के लिए उपयुक्त होती हैं।
2. गणेश जी की स्थिति: घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र लगाना अत्यंत शुभ है। लेकिन ध्यान रहे कि उनकी पीठ घर के बाहर की ओर और मुख घर के अंदर की ओर हो।
3. टूटी मूर्तियां: खंडित या टूटी हुई मूर्तियां तुरंत विसर्जित कर देनी चाहिए। ये नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और बनते कार्यों में बाधा डालती हैं।
4. दिशा नियम: हनुमान जी की मूर्ति हमेशा दक्षिण (South) दिशा की ओर देखते हुए लगानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने दक्षिण दिशा में ही अपनी शक्तियों का सर्वाधिक प्रदर्शन किया था।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
सही स्थान पर रखी मूर्तियां घर की रक्षा करती हैं और वातावरण में पवित्रता बनाए रखती हैं।
तुलसी और शुभ पौधे (Divine Plants/Tulsi)
पौधे साक्षात जीवन और प्राणवायु के प्रतीक हैं।
1. तुलसी का पौधा: तुलसी को हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान), उत्तर या पूर्व दिशा में ही लगाना चाहिए। तुलसी घर के वास्तु दोषों को सोखने की क्षमता रखती है। दक्षिण दिशा में तुलसी कभी न रखें।
2. मनी प्लांट: इसे घर के अंदर आग्नेय कोण (South-East) में रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यह शुक्र ग्रह और धन से संबंधित है।
3. कांटेदार पौधे: घर के अंदर कैक्टस या दूध निकलने वाले पौधे (जैसे कैक्टस) कभी न लगाएं। ये रिश्तों में कड़वाहट और तनाव पैदा करते हैं।
4. फूलों के चित्र: यदि असली पौधे न हों, तो पूर्व की दीवार पर खिलते हुए फूलों की पेंटिंग लगाने से भी सकारात्मकता बढ़ती है।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
उत्तर-पूर्व में रखे शुभ पौधे प्राणवायु (Oxygen) बढ़ाते हैं और परिवार में आरोग्य तथा खुशहाली लाते हैं।
दीवार घड़ी (Wall Clock)
घड़ी समय और प्रगति की सूचक है। इसकी गलत दिशा समय को रोक सकती है।
1. सर्वश्रेष्ठ दिशा: घड़ी को हमेशा उत्तर (North) या पूर्व (East) की दीवार पर लगाना चाहिए। उत्तर दिशा में घड़ी लगाने से नए अवसर प्राप्त होते हैं।
2. वर्जित दिशा: दक्षिण (South) दिशा में कभी भी घड़ी न लगाएं। यह यम की दिशा है और यहाँ घड़ी होने से घर के मुखिया की सेहत और प्रगति पर बुरा असर पड़ता है।
3. दरवाजे के ऊपर: किसी भी दरवाजे के ठीक ऊपर घड़ी नहीं होनी चाहिए। इससे उस दरवाजे से गुजरने वाली ऊर्जा प्रभावित होती है।
4. बंद घड़ी: बंद या रुकी हुई घड़ी घर में कभी न रखें। यह रुकी हुई किस्मत का प्रतीक है और राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती है।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
उत्तर या पूर्व की घड़ी जीवन में समय की पाबंदी, अनुशासन और निरंतर विकास सुनिश्चित करती है।
सजावटी पेंटिंग और कलाकृतियाँ (Art/Paintings)
पेंटिंग घर के अवचेतन मन को प्रभावित करती हैं।
1. बहता जल: उत्तर दिशा की दीवार पर झरने या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। इससे धन का आगमन बढ़ता है।
2. उगता सूर्य: पूर्व दिशा में उगते हुए सूर्य की पेंटिंग लगाने से मान-सम्मान और प्रसिद्धि (Fame) में वृद्धि होती है।
3. सात घोड़े: दौड़ते हुए सात सफेद घोड़ों की तस्वीर व्यापारिक सफलता के लिए दक्षिण या पूर्व की दीवार पर लगाई जा सकती है। घोड़े अंदर की ओर आते हुए दिखने चाहिए।
4. निषेध: युद्ध, रोते हुए बच्चे, कांटेदार झाड़ियां या डूबते जहाज की तस्वीरें घर में कभी न लगाएं। ये अवसाद और संघर्ष पैदा करती हैं।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
सकारात्मक पेंटिंग परिवार के सदस्यों के विचारों को ऊंचा उठाती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
नेम प्लेट (Name Plate)
नेम प्लेट घर की पहचान और प्रतिष्ठा का द्वार है।
1. स्थिति: नेम प्लेट हमेशा मुख्य द्वार के दाईं ओर (जब आप घर से बाहर देख रहे हों) होनी चाहिए।
2. सामग्री: लकड़ी, पीतल या मार्बल की नेम प्लेट सबसे अच्छी मानी जाती है। प्लास्टिक की नेम प्लेट से बचना चाहिए।
3. स्पष्टता: नेम प्लेट पर नाम स्पष्ट और पढ़ने योग्य होना चाहिए। धुंधले नाम अवसर को स्पष्ट नहीं होने देते।
4. प्रकाश: नेम प्लेट के ऊपर हमेशा एक छोटा लाइट बल्ब होना चाहिए ताकि वह अंधेरे में भी चमकती रहे।
आध्यात्मिक एवं सकारात्मक प्रभाव:
एक अच्छी नेम प्लेट घर की ओर सकारात्मक ऊर्जा, नए अवसर और सामाजिक यश को आकर्षित करती है।