विषय: स्वच्छता, शुद्धिकरण एवं नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन
घर की सफाई केवल भौतिक स्वच्छता नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। झाड़ू और कूड़ेदान जैसी वस्तुओं का सही स्थान और रख-रखाव यह तय करता है कि घर में लक्ष्मी का वास होगा या दरिद्रता का।
हिंदू धर्म और वास्तु में झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसे रखने की सबसे सही दिशा **दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)** है। झाड़ू को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए ताकि बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति की नजर उस पर न पड़े। जिस प्रकार हम अपने धन को छुपाकर रखते हैं, उसी प्रकार झाड़ू को भी ओझल रखना चाहिए। इसे लिटाकर (लेटी हुई अवस्था में) रखना ही वास्तु सम्मत है।
कूड़ेदान का स्थान घर में बहुत संवेदनशील होता है। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान) या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) में नहीं रखना चाहिए। कूड़ेदान के लिए सबसे उपयुक्त स्थान **दक्षिण-पश्चिम का पश्चिमी हिस्सा या उत्तर-पश्चिम (वायव्य)** है। यहाँ रखा कूड़ेदान घर की मानसिक अशांति और बेकार के विचारों को घर से बाहर निकालने में मदद करता है।
पोंछा लगाने वाली सामग्री और सफाई के केमिकल्स को उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना श्रेष्ठ है। शनिवार के दिन पोंछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक (Sea Salt) मिलाकर पोंछा लगाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। सफाई की वस्तुओं को रसोई या पूजा घर के पास कभी न रखें।
घर में जमा पुरानी रद्दी और कबाड़ राहु का प्रतीक होता है। इसे रखने के लिए केवल **दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)** कोना ही उपयोग में लाना चाहिए। यदि कबाड़ घर की उत्तर या पूर्व दिशा में है, तो यह विकास को पूरी तरह रोक देता है और मानसिक तनाव का कारण बनता है।
बाथरूम और शौचालय की सफाई के ब्रश और लिक्विड को हमेशा बाथरूम के अंदर ही एक निश्चित स्थान पर रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इन्हें दक्षिण या पश्चिम दिशा के कोने में छिपाकर रखना चाहिए। गंदा बाथरूम घर में राहु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।