बच्चों का कक्ष (Children's Room) - वास्तु निर्देश

विद्या, बुद्धि और संस्कार हेतु वास्तु सम्मत व्यवस्था

।। ज्ञानदायिनी सरस्वती मंत्र ।।

प्रतिदिन अध्ययन शुरू करने से पहले इस मंत्र का 11 बार जप करें:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः

(लाभ: एकाग्रता, स्मृति शक्ति और बुद्धिमत्ता में वृद्धि)

1. आदर्श स्थान और दिशा

ईशान (North-East): यहाँ अध्ययन कक्ष होने से गुरु (बृहस्पति) का आशीर्वाद मिलता है।
पूर्व (East): यहाँ से आने वाली सौर ऊर्जा बच्चों के स्वास्थ्य को उत्तम रखती है।
वायव्य (North-West): यह दिशा संचार और विचारशीलता के लिए उपयोगी है।

2. एकाग्रता बढ़ाने वाले विशेष टिप्स (Concentration Tips)


3. सामान की आंतरिक व्यवस्था (Internal Layout)

सामग्री/वस्तु सही दिशा/स्थान वास्तु नियम
बेड (पलंग) दक्षिण-पश्चिम भाग सोते समय सिर पूर्व (विद्या हेतु) या दक्षिण में हो।
अध्ययन मेज उत्तर या पूर्व मेज दीवार से सटाकर न रखें, पीछे ठोस दीवार हो।
कंप्यूटर/गैजेट्स दक्षिण-पूर्व (SE) बिजली के उपकरण अग्नि कोण में ही संतुलित रहते हैं।
अलमारी (भारी) दक्षिण या पश्चिम भारी सामान उत्तर-पूर्व में मानसिक बोझ बढ़ाता है।
विशेष निषेध (Strictly Avoid):

वास्तु उपचार (Remedies)