अध्याय २०: जल तत्व का प्रबंधन
नकारात्मक ऊर्जा का निकास और शुद्धि
स्नान घर वह स्थान है जहाँ हम अपने शरीर की गंदगी के साथ-साथ दिन भर की नकारात्मक ऊर्जा को भी धोते हैं। वास्तु के अनुसार, यहाँ जल तत्व की प्रधानता होती है। यदि स्नान घर गलत दिशा में हो, तो यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को 'ड्रेन' (Drain) कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य और आर्थिक हानि होती है।
यहाँ स्नान घर होने से व्यक्ति दिन भर तरोताजा महसूस करता है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
यदि जगह की कमी हो, तो वायव्य कोण में भी स्नान घर बनाया जा सकता है।
स्नान घर में पानी के नल (Taps) और शावर (Shower) हमेशा **उत्तर या पूर्व** की दीवार पर होने चाहिए। पानी का निकास (Drainage) भी हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।
| वस्तु/उपकरण | सही दिशा | महत्व |
|---|---|---|
| नल और शावर | उत्तर या पूर्व | जल का सकारात्मक प्रवाह |
| गीजर (Geyser) | दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) | अग्नि तत्व का स्थान |
| बाथटब (Bathtub) | पश्चिम या उत्तर-पूर्व | स्थिरता और विश्राम |
| वॉश बेसिन | उत्तर-पूर्व दीवार | शुद्धता का अनुभव |
स्नान घर में दर्पण हमेशा **उत्तर या पूर्व** की दीवार पर लगाएं। दर्पण कभी भी दक्षिण की दीवार पर नहीं होना चाहिए। यहाँ खिड़की का होना अनिवार्य है ताकि ताजी हवा और रोशनी का संचार होता रहे। अंधेरा और नमी वाला स्नान घर 'राहु' और 'केतु' के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।
स्नान घर के लिए **सफेद, हल्का नीला, आसमानी या हल्का हरा** रंग सबसे उपयुक्त है। ये रंग स्वच्छता और शांति के प्रतीक हैं। यहाँ गहरे लाल, काले या गहरे भूरे रंगों का प्रयोग करने से बचें, क्योंकि ये ऊर्जा को भारी बनाते हैं।
विशेष उपाय: स्नान घर के एक कोने में कांच के कटोरे में समुद्री नमक (Sea Salt) भरकर रखें। यह कमरे की सारी नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। इसे हर महीने बदलते रहें।