1. कबाड़ एवं रद्दी (Scrap Items)
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेसमेंट का उपयोग अक्सर स्टोरेज के लिए किया जाता है, लेकिन वहां रखे गए सामान की प्रकृति घर की ऊर्जा को प्रभावित करती है।
- पुराने अखबार: बेसमेंट में पुराने अखबारों का ढेर न लगाएं। यह बुध ग्रह को नकारात्मक बनाता है और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर करता है। यदि रखना अनिवार्य हो तो उन्हें उत्तर-पश्चिम (वायव्य) कोने में रखें।
- बंद घड़ियां: बंद घड़ियां रुकी हुई प्रगति का प्रतीक हैं। बेसमेंट में कभी भी बंद घड़ी न रखें। यह परिवार के सदस्यों के समय को पीछे धकेलती है।
- जंग लगा लोहा: जंग लगा लोहा राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है। इसे दक्षिण-पश्चिम कोने में कम समय के लिए रखा जा सकता है, लेकिन इसे हटा देना ही श्रेयस्कर है।
- टूटे कांच और फटे कपड़े: ये दरिद्रता और गृह-क्लेश का कारण बनते हैं। बेसमेंट के अंधेरे में इनकी ऊर्जा और भी घातक हो जाती है। इन्हें तुरंत विसर्जित करें।
2. निर्माण एवं मरम्मत सामग्री
घर में होने वाले बदलावों के लिए बची हुई सामग्री अक्सर बेसमेंट में रख दी जाती है।
- ईंटें और पत्थर: इन्हें बेसमेंट के दक्षिण या पश्चिम भाग में रखना चाहिए। भारी निर्माण सामग्री उत्तर या पूर्व में रखने से धन का प्रवाह रुक जाता है।
- लोहे के सरिये: सरियों को हमेशा ढककर रखें। खुला और फैला हुआ लोहा घर में तनाव पैदा करता है।
- पुराने पेंट के डिब्बे: पेंट के खाली या आधे भरे डिब्बे ज्वलनशील होते हैं और इनमें रासायनिक ऊर्जा होती है। इन्हें आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) की ओर व्यवस्थित रखें।
3. पानी की मोटर एवं मशीनरी
- पानी की मोटर: बेसमेंट में पानी की मोटर के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे उत्तम है। जल तत्व की सही स्थापना समृद्धि लाती है।
- पार्किंग कक्ष: बेसमेंट पार्किंग के लिए उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा का उपयोग करें। वाहन को कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान) के बिलकुल कोने में पार्क न करें।
- सीढ़ी (Ladder): सीढ़ियां हमेशा दक्षिण या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। बेसमेंट के मध्य में सीढ़ी कभी न बनाएं।
- वॉशिंग मशीन: इसे वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में रखें। यह वायु तत्व की दिशा है जो सफाई और सुखाने के लिए उत्तम है।
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### भाग 2: (शेष वास्तु जानकारी, सफाई सामग्री, पालतू जानवर, मेडिकल उपकरण, फूटर और जावास्क्रिप्ट)
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4. स्वच्छता एवं रखरखाव सामग्री
- बर्तन रैक एवं लॉन्ड्री बास्केट: बर्तन और कपड़े धोने के सहायक सामान को हमेशा व्यवस्थित रखें। लॉन्ड्री बास्केट को उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना श्रेष्ठ है।
- पोंछा (Mop) एवं सफाई सामग्री: पोंछा, डिटर्जेंट, कॉलिन आदि को कभी भी ईशान कोण में न रखें। इन्हें रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा चुनें। पोंछे को कभी खड़ा करके न रखें।
- शू रैक (Shoe Rack): बेसमेंट में जूते रखना वास्तु सम्मत नहीं है, लेकिन यदि रखना ही पड़े तो इन्हें पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में रखें। मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक नीचे बेसमेंट में जूते न रखें।
- शौच एवं स्नान सामग्री: साबुन, बॉडी वॉश, तौलिया आदि को नमी से दूर रखें। बेसमेंट के बाथरूम का वास्तु उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
5. चिकित्सा उपकरण एवं प्राथमिक चिकित्सा (First Aid)
दवाइयों का वास्तु सीधा स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।
- दवाइयां एवं फर्स्ट एड किट: बेसमेंट में दवाइयां रखना सामान्यतः टालना चाहिए क्योंकि नमी और अंधेरा दवाओं की शक्ति कम कर सकता है। यदि स्टोर करना है, तो उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में ऊंचे रैक पर रखें।
- स्वास्थ्य उपकरण (BP Machine, Oximeter आदि): इन संवेदनशील उपकरणों को पूर्व दिशा की ओर बने कैबिनेट में रखें ताकि ये सकारात्मक ऊर्जा से चार्ज रहें।
- वैसाखी एवं व्हीलचेयर: इन भारी सामानों को दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में रखना चाहिए। इससे घर में स्थिरता बनी रहती है और बीमारी का प्रभाव कम होता है।
6. पालतू जानवरों का वास्तु (Pet Vastu)
पालतू जानवरों के रहने का स्थान उनके और मालिक दोनों के स्वभाव को प्रभावित करता है।
- कुत्ते का कैनल (Dog Kennel): बेसमेंट में कुत्ता पालना हो तो उसे उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में रखें। यह दिशा उन्हें सक्रिय और वफादार बनाए रखती है।
- बिल्ली का बिस्तर: बिल्लियों के लिए दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम स्थान उपयुक्त है।
- पक्षियों का पिंजरा: पक्षियों को हमेशा उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में रखें जहां प्राकृतिक रोशनी आती हो। पिंजरे को कभी अंधेरे कोने में न रखें।
- गौशाला (Cow Shed): वैसे तो गौशाला खुली जगह पर होनी चाहिए, लेकिन यदि बेसमेंट का उपयोग पशुओं के लिए हो रहा है, तो दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) या उत्तर-पश्चिम का भाग चुनें।
- मछली घर (Aquarium): बेसमेंट में अक्वेरियम के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा सर्वोत्तम है। यह धन आगमन का द्वार खोलता है।
विशेष वास्तु सुझाव
बेसमेंट में कबाड़ जमा न होने दें। हर 3 महीने में इसकी सफाई करें। नमक के पानी से बेसमेंट का पोंछा लगाने से वहां की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। सुनिश्चित करें कि बेसमेंट का मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) हमेशा खाली और साफ रहे।