VASTU VIKAS - Ayadi Calculations
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आयादि गणना (Ayadi Calculations): वास्तु शास्त्र का गणितीय आधार

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा की माप और गणित का भी विज्ञान है। भवन निर्माण में आयादि षड्वर्ग (Ayadi Shadvarga) गणना वह पद्धति है जिसके माध्यम से हम यह सुनिश्चित करते हैं कि भवन का क्षेत्रफल और माप उसके स्वामी के लिए शुभ और समृद्धदायक होगा या नहीं।

आयादि गणना क्या है?

प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला 'मानसार' और 'मयमतम्' जैसे ग्रंथों में वर्णित आयादि गणना का मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मानव ऊर्जा के बीच तालमेल बिठाना है। 'आयादि' शब्द का अर्थ है 'आय आदि' (Income and others)। इसमें प्रमुखतः छह प्रकार की गणनाएँ की जाती हैं, जिन्हें षड्वर्ग कहा जाता है।

आयादि षड्वर्ग के छह मुख्य अंग

प्रत्येक भवन की लंबाई और चौड़ाई के गुणनफल (क्षेत्रफल या पद) के आधार पर निम्नलिखित गणनाएँ की जाती हैं:

1. आय (Aaya) - लाभ और समृद्धि

यह भवन के आर्थिक पक्ष को दर्शाता है। इसे निकालने का सूत्र है: (क्षेत्रफल × 8) ÷ 12। यहाँ जो शेषफल बचता है, वही 'आय' कहलाती है। इसमें ध्वज आय (1) को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

2. व्यय (Vyaya) - खर्च का आकलन

व्यय हमेशा आय से कम होना चाहिए। सूत्र: (क्षेत्रफल × 9) ÷ 10। यदि व्यय का मान आय से अधिक है, तो वह भवन आर्थिक तंगी लाता है।

3. नक्षत्र (Nakshatra) - ब्रह्मांडीय ऊर्जा

भवन का नक्षत्र स्वामी के नक्षत्र के साथ अनुकूल होना चाहिए। सूत्र: (क्षेत्रफल × 8) ÷ 27

4. वार (Vaara) - निर्माण का दिन

भवन की प्रकृति के अनुसार वार का चयन किया जाता है। सूत्र: (क्षेत्रफल × 9) ÷ 7। मंगल और शनिवार को सामान्यतः वर्जित माना जाता है।

5. अंशक (Anshaka) - गुण

यह भवन के चारित्रिक गुणों को दर्शाता है। सूत्र: (क्षेत्रफल × 6) ÷ 9

6. आयु (Aayu) - भवन का जीवनकाल

भवन की उम्र का आकलन किया जाता है। सूत्र: (क्षेत्रफल × 27) ÷ 100

विस्तृत गणना प्रक्रिया और महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम किसी प्लॉट पर घर बनाने की योजना बनाते हैं, तो सबसे पहले हमें 'पद' या क्षेत्रफल का निर्धारण करना होता है। यह पद हस्त (Hands) या गज में मापा जाता है।

क्षेत्रफल का चयन

भवन की लंबाई और चौड़ाई का चयन इस प्रकार किया जाता है कि गणना के बाद शेषफल 'शुभ' संख्या में आए। उदाहरण के लिए, यदि शेषफल 1, 3, 5, 7 आता है, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। विषम संख्याएँ (Odd Numbers) ऊर्जा के निरंतर प्रवाह को दर्शाती हैं।

अष्ट वर्ग का महत्व

अष्ट वर्ग में गरुड़, मार्जार (बिल्ली), सिंह, श्वान (कुत्ता), सर्प, गज (हाथी) और वृषभ के प्रतीक होते हैं। इनमें सिंह, वृषभ और गज को गृह निर्माण के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।

आयादि गणना के लाभ

आधुनिक निर्माण और आयादि

आज के युग में जहाँ कंक्रीट के जंगल बन रहे हैं, वहाँ लोग केवल डिज़ाइन देखते हैं। लेकिन Vastu Vikas ऐप आपको यह सुविधा देता है कि आप अपने उपलब्ध क्षेत्रफल को इन सूत्रों में डालकर यह देख सकें कि वह आपके लिए कितना अनुकूल है।

प्रमुख सूत्र संग्रह (Technical Formulas)

क्रमांक तत्व सूत्र (Formula) विभाजक (Divisor)
1आय (Aaya)क्षेत्रफल × 812
2व्यय (Vyaya)क्षेत्रफल × 910
3नक्षत्र (Nakshatra)क्षेत्रफल × 827
4योनि (Yoni)क्षेत्रफल × 38

ऊपर दी गई तालिका आयादि गणना के मुख्य स्तंभों को दर्शाती है। यदि आप अपने घर का वास्तु पूर्णतः ठीक करना चाहते हैं, तो इन गणनाओं को अनदेखा न करें। वास्तु विकास ऐप का यह मॉड्यूल आपको सटीक डेटा प्रदान करता है।